पर्यटन और आतिथ्य


 

अवलोकन

भारत का पर्यटन उद्योग , दुनिया के 182 देशों में 7वें स्थान पर है। 2017 में 10.18 मिलियन विदेशी पर्यटकों के आगमन के साथ इस क्षेत्र में 15.6% की बढ़ोत्तरी हुई। जनवरी-नवंबर 2018 के बीच 93,67,424 विदेशी पर्यटक भारत आएजबकि 2017 में यह आंकड़ा 88,67,963 था। इस अवधि के दौरान, इस क्षेत्र में 5.6% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। जनवरी-नवंबर 2017 के दौरान 14,56,615 पर्यटक ई-टूरिस्ट वीज़ा पर पहुंचे, जबकि 2018 में इस अवधि के दौरान यह आंकड़ा 20,61,511 रहा और इसमें पिछले साल की तुलना में 41.5% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। जनवरी-अक्टूबर 2018 के दौरान विदेशी मुद्रा आय में वर्ष दर वर्ष 11.9% की बढ़ोत्तरी हुई है। जनवरी–अक्टूबर 2018 में विदेशी मुद्रा आय 1,58,846 करोड़ रुपए रही, जबकि जनवरी–अक्टूबर 2017 में यह 1,41,965 करोड़ रुपए थी।

वित्तीय वर्ष 2017 के दौरान घरेलू पर्यटन 2.3% की वार्षिक विकास दर से बढ़ा और सभी राज्यों की यात्रा करने वालों की संख्या 1652.49 मिलियन रही। इस अवधि के दौरानकुल विश्व पर्यटक आगंतुकों में भारत का हिस्सा 1.17% रहा, वहीं विश्व पर्यटन आगन्तुकों में भारत 2.05% हिस्से के साथ (यूएस डॉलर में) 13वें स्थान पर रहा।

भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पोर्टल के अनुसार, पर्यटन क्षेत्र में हर 1 मिलियन यूएस डॉलर के निवेश पर 78 रोजगारों का सृजन होता है। पर्यटन क्षेत्र में 2017 के दौरान लगभग 41,622 रोजगारों का सृजन हुआ। देश के कुल जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 9.38% है।

अप्रैल-दिसंबर 2018 के बीच भारत में अनुमोदित होटलों की संख्या इस प्रकार है:

क्रमांक होटलों की श्रेणी होटलों की संख्या
1. एक सितारा 3
2. दो सितारा 1
3. तीन सितारा 106
4. चार सितारा 56
5. पांच सितारा 33
6. पांच सितारा डीलक्स 32
स्रोत: पर्यटन मंत्रालय

भारत में पर्यटन उद्योग क्रूज, एडवेंचर, मेडिकल, ग्रामीण, खेल और तंदुरुस्ती, बैठकों, इन्सेंटिव, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों (एमआईसीई), पर्यावरण पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में फैला है। भारत में लग्जरी ट्रैवल बाजार में 2015 में 12.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो किसी भी अन्य ब्रिक्स देश की तुलना में सबसे अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2017 में बिजनेस टूरिज़म पर कुल खर्च 11.6 अरब यूएस डॉलर था, जबकि लीज़र पर्यटन पर खर्च 201.7 अरब यूएस डॉलर रहा था।

देश के बाह्य पर्यटन रुझानों का पता निम्न तालिका से चलता है:

राशि $ अरब (खर्च करने वाली श्रेणियों के लिए)

विवरण 2015 2016 2017 2018 (अनुमानित)
कुल घरेलू यात्रा खर्च $163.8 $179.30 $186.0 $199.60
कुल विदेशी आवक आगंतुक खर्च $21.9 $24.20 $27.3 $29.7
बाह्य पर्यटन पर कुल खर्च $16.3 $18.0 $18.0 $18.80
कुल बाजार (बाहर जाने वाले यात्रियों की कुल संख्या लाख में) 20.38 21.87 22.0 (अनुमानित) 22.50
स्रोत: विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद (डब्ल्यू टी टी सी)

पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत 100% एफडीआई की अनुमति है, जो लागू नियमों और कानूनों के अधीन है। होटल, रिसॉर्ट और मनोरंजक सुविधाओं के विकास सहित पर्यटन निर्माण परियोजनाओं में 100% एफडीआई की अनुमति है। औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अनुसार, अप्रैल 2000 से जून 2018 के दौरान पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में 11.39 अरब यूएस डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रहा।

चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) के देश के अन्य प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों को पछाड़ने की उम्मीद है। 2020 तक चिकित्सा पर्यटन के 9 मिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दूसरी ओर, 2028 तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन 30.5 मिलियन होने का अनुमान है। जनवरी-सितंबर 2018 के दौरान, ई-वीजा पर आने वाले पर्यटकों की संख्या 1.58 मिलियन थी, जो वर्ष के अंत तक पिछले वर्ष के 1.69 मिलियन के बेंचमार्क को पार कर सकती है। मार्च 2018 तक 163 देशों में ई-वीजा सुविधा दी जा रही है। 2017 में, जीडीपी में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र का प्रत्यक्ष योगदान 5.94 ट्रिलियन रुपए (91.27 बिलियन यूएस डॉलर) था। 2028 तक इसके 12.68 ट्रिलियन रुपए (194.69 बिलियन यूएस डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 2012-28 के दौरान 7.23 प्रतिशत के सीएजीआर से वृद्धि होगी।

निम्न तालिका वित्त वर्ष 2018 में पर्यटन के अनुमानित आंकड़ों को दर्शाती है:

$ अरबों में गिनती

मेट्रिक्स 2018(अनुमानित)
रोजगार में प्रत्यक्ष योगदान (% वृद्धि) 2.8%
बिजनेस पर्यटन खर्च 13.5
लीज़र पर्यटन खर्च 236.7
रोजगार में कुल योगदान (%) 8.1 %
सकल घरेलू उत्पाद में कुल योगदान (%) 9.4%
आगंतुक निर्यात (विदेशी खर्च) 32.4
विदेश यात्रा और पर्यटन व्यय 20.5
निवेश (पूंजी निवेश) 48.4
सरकारी व्यक्तिगत व्यय 0.5
घरेलू पर्यटन खर्च 217.8
आंतरिक पर्यटन और यात्रा खपत 250.2
स्रोत: विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद (डब्ल्यूटीटीसी)

 

चुनिंदा सरकारी पहलें

 

  • पूर्वोत्तर राज्यों में अगस्त 2016 में 12 आतिथ्य प्रबंधन (हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट) संस्थानों को मंजूरी दी गई।
  • ‘स्वदेश दर्शन योजना’- देश में सुनियोजित तरीके से निर्धारित समय में थीम आधारित सर्किटों के विकास के लिए पर्यटन मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं में से एक है। यह योजना 2014 -15 में शुरू की गई थी। मंत्रालय द्वारा अब तक 31 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को 5997.47 करोड़ रुपए की कीमत वाली 74 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। अब तक 13 टूरिज्म सर्किट चिह्नित किए गए हैं और कुछ ‘वॉक थ्रू इंडिया’ द्वारा प्रस्तावित टूरिस्ट सर्किट जैसे कि शिव मंदिर सर्किट, पूर्वोत्तर भारत सर्किट, बौद्ध सर्किट, हिमालयन सर्किट, तटीय सर्किट, जैन सर्किट, कृष्णा सर्किट, रेगिस्तान, जनजातीय सर्किट, ईको सर्किट, गुरुद्वारा सर्किट, एडवेंचर टूरिज्म सर्किट और क्रूज टूरिज्म सर्किट। योजना की जनजातीय सर्किट थीम के तहत, सितंबर 2018 में मंत्रालय ने नागालैंड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के लिए 381.37 करोड़ मूल्य की 4 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा बाजार में भारत की छवि को चमकाने के लिए 2017 में "अतुल्य भारत 2.0' अभियान शुरू किया गया। पर्यटन सहायकों के रूप में कुशल मैनपावर विकसित करने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय ने ‘ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम’ शुरू किया है। यह पहल देश के दूरस्थ युवाओं को कुशल बनाने और पैन इंडिया आधार पर पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने में सक्षम बनाएगी। ‘ऑनलाइन लर्निंग प्रोग्राम’ से रोजगार पैदा होंगे और पर्यटकों को उचित कीमत पर पर्यटन सहायक भी मिल सकेंगे। ‘अतुल्य भारत पर्यटक सहायक प्रमाणन’ में वर्तमान में देश भर में 3800 से ज्यादा नामांकन हुए हैं।
  • ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन ड्राइव’ (प्रसाद) के लिए 100 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 2017-18 बजट के तहत, इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए 412 करोड़ रुपए प्रदान किए गए।
  • पर्यटन मंत्रालय ने महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारों के सहयोग से "बुद्ध पथ- द लिविंग हेरिटेज" थीम पर ‘अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव-2018’ का आयोजन किया।
  • ‘नेशनल हेरिटेज डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटेशन योजना’ (हृदय) जनवरी 2015 में लॉन्च की गई थी, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और जीर्णोद्धार करने का प्रयास करती है। हृदय हेरिटेज साइटों के एकीकृत, समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली योजना है। यह न केवल स्मारकों के रखरखाव बल्कि अपने नागरिकों, पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायों सहित पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की उन्नति पर बल देती है। शहर की जनसंख्या के आधार पर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) को 89.31 करोड़ रुपए, अमृतसर (पंजाब) 69.31 करोड़ रुपए, वारंगल (तेलंगाना) 40.54 करोड़ रुपए, अजमेर (राजस्थान) 40.04 करोड़ रुपए, गया (बिहार) 40.40 करोड़ रुपए, मथुरा (उत्तर प्रदेश) 40.04 करोड़ रुपए, कांचीपुरम 23.04 करोड़ रुपए और वेल्लंकिनी 22.26 करोड़ रुपए (दोनों तमिलनाडु में), अमरावती (आंध्र प्रदेश) 22.26 करोड़ रुपए, बादामी (कर्नाटक) - 22.2 करोड़ रुपए, द्वारका (गुजरात) 22.26 करोड़ रुपए और पुरी (ओडिशा) 22.54 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • पूरे भारत में 2-सितारा और इससे ऊपर की श्रेणी के नए होटल स्थापित करने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 35 एडी के तहत निवेश संबंधी कटौती का प्रावधान है।इस प्रकार वर्ष के दौरान भूमि, सद्भावना और वित्तीय साधनों को छोड़कर किसी भी प्रकार के पूंजीगत व्यय के संबंध में 100% कटौती की अनुमति है।
  • राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहन में रियायती भूमि की लागत, स्टांप शुल्क में छूट, भूमि की बिक्री/ पट्टे पर छूट, बिजली शुल्क प्रोत्साहन, ऋण पर ब्याज की रियायती दर, निवेश सब्सिडी/ कर प्रोत्साहन, पिछड़े क्षेत्रों की सब्सिडी और मेगा परियोजनाओं के लिए विशेष छूट पैकेज शामिल हैं।
  • पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड - विशेष क्षेत्रों में परियोजनाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।