टेक्सटाइल्स


 

संक्षिप्त विवरण

30 अप्रैल, 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक देश में संगठित क्षेत्र में करीब 1982 कॉटन फाइबर और मानव निर्मित फाइबर टेक्सटाइल मिलें हैं। इन आंकड़ों के अनुसार इन टेक्सटाइल मिलों की उत्पादन क्षमता लगभग 46.1 मिलियन स्पिंडल और लगभग 0.6 मिलियन रोटर है।

2015-16 में धागे का उत्पादन 3.2% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के साथ 5661 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया था। वहीं, इसी अवधि के दौरान फाइबर उत्पादन 0.3% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के साथ 1347 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया था। 2011-12 में फाइबर उत्पादन वर्ष-दर-वर्ष 0.9% की गिरावट के बाद लगातार बढ़ रहा है। 2015-16 में कुल फैब्रिक उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 0.9% की वृद्धि हुई और यह 65860 मिलियन वर्ग मीटर रहा।

पावरलूम सेक्टर ग्रे और प्रसंस्कृत फैब्रिक दोनों की बड़ी वैराइटी प्रदान करता है। एक अनुमान के मुताबिक देश में 24.69 लाख पावरलूम लगभग 5 लाख इकाइयों में बंटी हुई हैं, जिनसे लगभग 62 लाख श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। 2015-16 के दौरान, भारतीय पावरलूम सेक्टर द्वारा फैब्रिक उत्पादन में (-) 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और यह 37346 लाख वर्ग मीटर तक जा पहुंचा जिसमें 40% से अधिक कॉटन फैब्रिक का हिस्सा रहा। 2015-16 में देश के कुल फैब्रिक उत्पादन का लगभग 57% उत्पादन पावरलूम सेक्टर से ही हुआ।

हथकरघा क्षेत्र भारत की अद्वितीय सांस्कृतिक विविधता और फैशन के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। हथकरघा क्षेत्र द्वारा 2015-16 में उत्पादन में 5.7% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हुई और कुल 7616 मिलियन वर्ग मीटर उत्पादन दर्ज किया गया।

होजरी क्षेत्र द्वारा भारत में 2015-16 में पिछले वर्ष की तुलना में 4.4% की वृद्धि के साथ लगभग 17641 लाख वर्ग मीटर फैब्रिक का उत्पादन दर्ज किया गया। देश के कुल फैब्रिक उत्पादन का एक-चौथाई से अधिक होजरी क्षेत्र से ही हुआ।

वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान भारत से टेक्सटाइल और रेडीमेड कपड़ों का निर्यात (कालीन सहित) पिछले वर्ष की तुलना में (-) 2.4% की गिरावट के साथ 36.7 बिलियन यूएस डॉलर का रहा। रेडीमेड कपड़ों के निर्यात में 2015-16 में 0.8% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई। परिधान और क्लोदिंग एक्सेसरीज आर्टिकल, बुने हुए या क्रोशिया किए हुए नहीं (एचएसः 62) भारत से सबसे ज्यादा निर्यात होने वाले टेक्सटाइल्स में शामिल हैं। टेक्सटाइल और गारमेंट्स के आयात में इस वर्ष के दौरान (-) 2.7% की गिरावट दर्ज की गई।

भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट सौ से अधिक देशों को निर्यात किए जाते हैं। 2015-16 में भारत से निर्यात होने वाले कुल टेक्सटाइल और गारमेंट का सबसे ज्यादा 20.5% निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका को रहा। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (12.2%), ब्रिटेन (6.5%), बांग्लादेश (5.7%) और चीन (5.4%) का स्थान रहा। वहीं, 2015-16 में भारत द्वारा सबसे ज्यादा 43% आयात चीन द्वारा किया गया। इसके बाद बांग्लादेश (6.8%), संयुक्त राज्य अमेरिका (5.4%), ऑस्ट्रेलिया (3.4%), और ताइवान (3.1%) का स्थान रहा।

भारत के कुल निर्यात में टेक्सटाइल उद्योग और रेडीमेड गारमेंट्स का हिस्सा पिछले 15 वर्षों में कम हुआ है। वित्तीय वर्ष 2000-01 में भारत के कुल निर्यात में टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट (कालीन सहित) का हिस्सा 25.6% था, जो वित्तीय वर्ष 2015-16 में 14% तक गिर गया। हालांकि, टेक्सटाइल के विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा वर्ष 2000 के 3.4% से बढ़कर 2014 में 6.3% हो गया। वहीं, रेडीमेट गारमेंट्स के विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा वर्ष 2000 के 3.0% से बढ़कर 2014 में 3.8% हो गया।

टेक्सटाइल सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है, जिसके लिए भारत सरकार या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किसी पूर्व अनुमोदन की जरूरत नहीं है। अप्रैल 2000 से मार्च 2016 तक की अवधि के लिए टेक्सटाइल क्षेत्र में एफडीआई 1,852.47 मिलियन यूएस डॉलर रही, जो इसी अवधि में कुल एफडीआई अंतर्वाह का 0.64 प्रतिशत है।

सूती धागे और मिश्रित यार्न की घरेलू मांग मार्च 2017 को समाप्त वर्ष के दौरान बढ़ने की उम्मीद है। मांग में वृद्धि की यह उम्मीद अपैरल्स, घरेलू टेक्सटाइल और तकनीकी टेक्सटाइल निर्माताओं द्वारा खरीद बढ़ने की संभावना के आधार पर की जा रही है।

इस वर्ष घरेलू बाजार में भी अपैरल्स की खपत बढ़ने की उम्मीद है। आर्थिक विकास, अनुमानित सामान्य मानसून और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने से सभी उपभोक्ता वर्ग की आय में वृद्धि होने की संभावना है। इसके साथ-साथ बेहतर होती जीवनशैली, बदलते फैशन तथा संगठित खुदरा बाजार और ई-कॉमर्स में तेज वृद्धि के चलते भी फैब्रिक और अपैरल्स की खपत बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्र के मंदी से उबरने की संभावना से भी घरेलू और तकनीकी टेक्सटाइल्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

2016-17 में अपैरल, घरेलू टेक्सटाइल्स और मेड-अप्स का निर्यात भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। सरकार भारत से मर्चेंडाइज का निर्यात बढ़ाने के लिए सक्रियता से कदम उठा रही है। सरकार ने देश से कपड़ा निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टेक्सटाइल सेक्टर के लिए हाल ही में 60 अरब रुपए के विशेष पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा, बजट में घोषित उपायों से भी अपैरल निर्यात में विकास की संभावना है।

हालांकि, भारतीय कॉटन यार्न के सबसे बड़े आयातक देश चीन द्वारा शुरू की गई रिजर्व कॉटन की नीलामी से वर्ष के दौरान भारत का कॉटन यार्न निर्यात प्रभावित हो सकता है। रिजर्व कॉटन यार्न की नीलामी से चीनी टेक्सटाइल मिलों में भारत के कॉटन यार्न की मांग कम हो सकती है। इसलिए, कुल यार्न निर्यात में वृद्धि में गिरावट की आशंका है।

2016-17 में मानव निर्मित रेशों और फाइबर की मांग बढ़ने की भी उम्मीद है। मांग में वृद्धि की यह उम्मीद फैब्रिक और अपैरल विनिर्माताओं तथा घरेलू और तकनीकी टेक्सटाइल उत्पादकों द्वारा इस वर्ष के दौरान खरीद बढ़ने की संभावनाओं के आधार पर जताई जा रही है।


 

कुछ सरकारी प्रोत्साहन

  • सरकार द्वारा संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस) को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसके अंतर्गत अपैरल, गारमेंट और तकनीकी टेक्सटाइल्स को पूँजी निवेश पर 15% सब्सिडी मिलेगी, जो पांच साल के लिए अधिकतम 30 करोड़ रुपए हो सकती है। शेष सब-सेक्टरों को 10% सब्सिडी मिलेगी, जो अधिकतम 20 करोड़ रुपए हो सकती है। 2016-17 के केंद्रीय बजट में एटीयूएफएस के लिए 14.80 अरब रुपए का आवंटन किया गया था।
  • एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) 2005 में शुरू की गई थी, ताकि टेक्सटाइल इकाइयां स्थापित करने के लिए इस उद्योग को विश्वस्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं दी जा सकें। केंद्रीय बजट 2016-17 में एकीकृत वस्त्र पार्क योजना के अंतर्गत 1 अरब रुपए का आवंटन किया गया था।
  • रेडीमेड गारमेंट्स, घरेलू टेक्सटाइल्स, फैब्रिक्स और कॉटन यार्न पर सीमा शुल्क केंद्रीय बजट 2016-17 में 10.3 प्रतिशत कर दिया गया, ताकि स्वदेशी उद्योग में आयात कम से कम हो। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बजट 2016-17 में मानव-निर्मित विशेष फाइबरों और यार्न पर आधारभूत सीमा शुल्क को आधा घटाकर 2.5% कर दिया गया।
  • केंद्रीय बजट 2016-17 के अंतर्गत 1000 रुपए और इससे ज्यादा कीमत के ब्रांडेड गारमेंट्स पर उत्पाद शुल्क शून्य से बढ़ाकर 2% (सेनवैट क्रेडिट के बिना) और सेनवैट क्रेडिट के साथ 12.5% कर दिया गया। इसके अलावा रेडीमेड गारमेंट्स और अन्य टेक्सटाइल माल पर उत्पाद/प्रतिकारी शुल्क के लिए टैरिफ वेल्यू (आनुमानिक) खुदरा बिक्री मूल्य की दोगुनी 60% कर दी गई।
  • निर्यात ऋण ब्याज अनुदानः भारतीय रिज़र्व बैंक ने निर्यात ऋण के लिए पात्र मौजूदा क्षेत्रों पर ब्याज अनुदान की दर 3% से घटाकर 2% कर दी है, जो 1 अगस्त, 2013 से लागू है। रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर को भी इसका लाभ मिलता है।

 

कुछ निर्यात बाजार विनियामक

टेक्सटाइल फाइबर प्रोडक्ट्स आइडेंटिफिकेशन एक्ट, वूल प्रोडक्ट्स लेबलिंग एक्ट, फर प्रोडक्ट्स लेबलिंग एक्ट और फेडरल ट्रेड कमीशन जैसे विनियमन के तहत ऊन और फर उत्पादों की लेबलिंग और उनमें इस्तेमाल किए गए फाइबर या फर का विवरण देने वाला टैग लगाना, कंपनी का नाम या विनिर्माता, आयातक, वितरक अथवा विक्रेता के आयोग द्वारा जारी और रजिस्टर्ड चिह्न लगाना अनिवार्य है। इसके साथ ही उत्पाद के मूल देश का टैग लगाना भी अनिवार्य है। पहने जाने वाले कपड़ों पर उस कपड़े का विवरण और रखरखाव के लिए निर्देश के लेबल लगाना अनिवार्य है। सभी टेक्सटाइल्स पर मूल देश का लेबल लगाना अनिवार्य है। साथ ही निर्देश है कि यार्न, थ्रैड, ऊन की पैकिंग ऐसे की जाए कि अंतिम खरीदार को भी उत्पाद का मूल देश स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

टेक्सटाइल उत्पादों को यूरोपीय संघ बाजार में सिर्फ इस शर्त के साथ उतारा जा सकता है जब उन पर समुचित लेबलिंग हो और उनके साथ यूरोपीय संसद और परिषद के विनियामक (ईयू) संख्या 1007/2011 के अनुपालन के वाणज्यिक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं।

विनियामक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को टेक्सटाइल उत्पाद खरीदते समय उनके फाइबर के बारे में एकदम सही जानकारी दी जा सके।

ईयू बाजार में कुछ निश्चित रासायनिक पदार्थों, उन पदार्थों के समूह अथवा उन रासायनिक पदार्थों के मिश्रण वाले टेक्सटाइल और चमड़े के उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, ताकि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। इस संबंध में जारी प्रावधानों को यूरोपीय संसद और परिषद (रीच विनियामक) के विनियामक संख्या 1907/2006 के अनुलग्नक XVII में सूचीबद्ध किया गया है।


विभिन्न देशों में लागू विनियामकों की अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें: http://www.standardsmap.org/identify