दवा उद्योग


 

संक्षिप्त विवरण

स्वास्थ्य दुनिया के सामाजिक और आर्थिक विकास में सर्वोपरि महत्व का क्षेत्र है। यही वजह है कि दवा (फार्मासूटिकल्स) उद्योग को आर्थिक विकास की प्रक्रिया में एक प्रमुख उद्योग के रूप में देखा जाता है। भारतीय दवा उद्योग वैश्विक फार्मा सेक्टर में एक उल्लेखनीय स्थान हासिल कर चुका है और हाल के वर्षों में इसमें उल्लेखनीय विकास हुआ है।

घरेलू मांग की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ दवा उद्योग संविदा पर विनिर्माण, अनुसंधान, क्लीनिकल ट्रायल, शोध एवं विकास और विकसित एवं विकासशील देशों के बाजारों को सीधे निर्यात में भी संलग्न है। वैश्विक रूप से, भारतीय दवा बाजार आकार के लिहाज से तीसरा सबसे बड़ा और कीमत के लिहाज से 13वां सबसे बड़ा बाजार है।

भारतीय दवा उद्योग में 2011-16 के दौरान 5.64 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि दर्ज की गई और यह 2011 के 20.95 अरब डॉलर से बढ़कर 2016 में 27.57 अरब डॉलर का हो गया। वित्तीय वर्ष 2017 में इस उद्योग के राजस्व में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि होने का पूर्वानुमान है। 2020 तक भारत का दवा उद्योग वृद्धि के मामले में शीर्ष तीन दवा बाजारों में शामिल होगा और आकार के मामले में छठा सबसे बड़ा बाजार होगा।

दवा उत्पादों के निर्यात में 2015-16 के दौरान 11.8 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर दर्ज की गई और यह 12.9 अरब यूएस डॉलर का रहा। 2010-11 से 2015-16 की अवधि के दौरान दवा उत्पादों के निर्यात में 14 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज की गई और इसका निर्यात मूल्य 6.7 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर लगभग 12.9 अरब यूएस डॉलर हो गया। 2016-17 के दौरान दवा उत्पादों का निर्यात 12.9 अरब डॉलर के साथ स्थिर रहा।

भारत से दवा उत्पादों का निर्यातों
वर्ष बिलियन यूएस डॉलर वृद्धि दर (%)
2011-12 8.5 27.1
2012-13 10.1 18.6
2013-14 11.1 10.7
2014-15 11.6 4
2015-16 12.9 11.4
2016-17 12.9 0.2
स्रोतः डीजीसीआईएस
भारतीय दवा उत्पादों के प्रमुख निर्यात स्थल
देश निर्यात मूल्य (मिलियन यूएस डॉलर) हिस्सा (%)
अमेरिका 5,098.3 39.4
यूके 444.5 3.4
दक्षिण अफ्रीका 393.8 3.0
रूस 351.1 2.7
नाइजीरिया 345.3 2.7
केन्या 292.8 2.3
ऑस्ट्रेलिया 213.8 1.7
श्रीलंका 200.7 1.6
ब्राजील 197.9 1.5
फिलीपींस 191.0 1.5
कुल 12,929.9 100
स्रोत: डीजीसीआईएस

एफडीआई नीति

  • ग्रीनफील्ड फार्मा परियोजनाओं के लिए ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है।
  • ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में निवेश के लिए सरकारी मार्ग के तहत 100% तक एफडीआई की अनुमति है, जिसमें 74% तक एफडीआई ऑटोमैटिक रूट से है। 74% से ऊपर के एफडीआई के लिए सरकारी अनुमोदन रूट के अंतर्गत अनुमत है।

अन्य शर्तें

  • विशेष परिस्थितियों को छोड़कर 'गैर-प्रतिस्पर्धा' क्लॉज की अनुमति नहीं होगी, यदि अनुमति दी जाएगी तो विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड के जरिए दी जाएगी।
  • संभावित निवेशक और संभावित निवेशी को अनुलग्न-1 में उल्लिखित अनुसार एफआईपीबी आवेदन के साथ एक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
  • सरकार ब्राउनफील्ड मामलों के लिए मंजूरी देते समय यथोचित शर्तें लागू कर सकती है।

बीते कुछ समय से भारतीय दवा क्षेत्र में अमेरिकी बाजारों से राजस्व में गिरावट आई है, जो इस क्षेत्र का नवीनतम विदेशी बाजार है। इसके चलते इस क्षेत्र को दबाव और अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, विनियामकीय जटलिताएं और जेनरिक दवाओं का बाजार इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है।

इन सब चिंताओं के बावजूद, बढ़ते उपभोक्ता खरीद वर्ग, तेजी से होते शहरीकरण और स्वास्थ्य बीमा में वृद्धि के चलते भारतीय दवा उद्योग के आने वाले समय में इस स्थिति से उबर आने की पूरी संभावना है। बायोटेक उद्योग में तेज वृद्धि और बड़ी कंपनियों द्वारा अनुसंधान और विकास पर अपना खर्च बढ़ाने से उस उद्योग की उम्मीदें बंधी हैं।

फार्मा उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने लागत कम करने और स्वास्थ्य सेवा खर्च कम करने संबंधी कई उपाय किए हैं। बाजार में जेनरिक दवाओं को तेजी से लाने पर ध्यान केंद्रित रहा है और इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से भी इस उद्योग को बल मिलने की संभावना है, क्योंकि इससे दो डीलरों के बीच दो राज्यों में किया जाने वाला आदान-प्रदान टैक्स-न्यूट्रल हो जाएगा। इससे एक से अधिक राज्यों पर निर्भरता कम होगी और क्षेत्रीय केंद्रों पर फोकस बढ़ाने में मदद मिलेगी।


 

कुछ चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • स्टार्ट अप को सहयोग के लिए सेतु (सेल्फ एंप्लॉयमेंट एंड टैलेंट यूटिलाइजेशन) कार्यक्रम बनाया गया है, ताकि प्रौद्योगिकी-वित्तीय सहयोग तथा प्रारंभिक सहायता के साथ उनका सुगमीकरण किया जा सके। नीति आयोग में शुरुआत तौर पर इसके लिए 13.38 मिलियन डॉलर की राशि से एक कोष बनाया गया है।
  • राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर नवोन्मेष को बढ़ावा देने और नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से नीति आयोग में शिक्षाविदों को शामिल करते हुए अटल इनोवेशन मिशन (ऐम) स्थापित किया गया है।
  • हस्तांतरण मूल्य निर्धारण नियमन लागू होने की सीमा बढ़ा दी गई है। घरेलू ट्रांजैक्शन की सीमा को 0.77 मिलियन यूएस डॉलर से बढ़ाकर 3.08 मिलियन यूएस डॉलर कर दिया गया है।
  • कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट ऑपरेटरों के लिए सेवा कर में छूट दी गई है।
  • देश में प्रौद्योगिकी विकास को सुगम बनाने के लिए तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी और शुल्क पर आयकर की दर को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • इनपुट और इनपुट सेवाओं पर सेनवैट क्रेडिट लेने के लिए समय सीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक साल कर दिया गया है।
  • संबंधित अधिनियमों में एसईजेड / एनआईएमजेड के रूप में परिभाषित क्षेत्रों में लगी इकाइयों के लिए प्रोत्साहन.
  • पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे विशेष क्षेत्रों में परियोजनाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन
  • एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, परीक्षण केंद्रों जैसी संयुक्त सुविधाओं के विकास हेतु योजना।
  • उपर्युक्त के अलावा, भारत के प्रत्येक राज्य में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है।
  • रियायती (सब्सिडाइज्ड) कीमतों पर भूमि उपलब्ध कराना, जमीन बेचने / लीज पर देते हुए स्टांप ड्यूटी में छूट, बिजली की टैरिफ दरों में छूट, ऋणों पर रियायती ब्याज दर, निवेश सब्सिडी / करों में छूट, पिछड़े क्षेत्रों में सब्सिडी, बड़ी परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन पैकेज आदि जैसे प्रोत्साहन दिए जाते हैं।

उद्योग/निजी प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रम:

  • आयकर अधिनियम की धारा 35 (2 एए) के अंतर्गत भारित कर छूट दी जाती है।
  • किसी भी राष्ट्रीय लैबोरेट्री, विश्वविद्यालय या प्रौद्योगिकी संस्थान को किसी विशेष व्यक्ति को विशेष विनिर्दिष्ट -उद्देश्यों के साथ किए गए भुगतान के लिए 200% की भारित छूट प्रदान की जाती है। बशर्ते कि वह रकम विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित कार्यक्रम में वैज्ञानिक शोध के लिए इस्तेमाल की गई हो।

विनिर्माण में संलग्न कंपनियां, जिनके अपने शोध एवं विकास केंद्र हैं

  • वैज्ञानिक शोध और विकास पर किए गए पूंजीगत और राजस्व दोनों तरह के खर्च पर आयकर अधिनियम की धारा 32 (2एबी) के अंतर्गत 200% की भारित छूट दी जाती है। जमीन और इमारत पर खर्च इस छूट में शामिल नहीं किया जाता।
  • थोक दवाएं विकसित करने और उनके शोध को सुगम बनाने के लिए हैदराबाद में एक राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
  • फार्मासूटिकल्स संदर्भ मानकों का शुल्क रहित आयात।

 

यूएस एफडीए

यूएस एफडीए नाम की संस्था विनिर्माण साइटों का निरीक्षण करती है और जांचती है कि वर्तमान मानक विनिर्माण पद्धतियों का अनुपालन हो रहा है या नहीं। साइट मंजूरी के लिए विनिर्माण संचालनों द्वारा वर्तमान मानक विनिर्माण पद्धतियों (सीजीएमपी) का अनुपालन किया जाना अनिवार्य है। यदि संचालन के दौरान आदर्श विनिर्माण पद्धतियों से कोई विसंगति पाई जाती है तो एफडीए फॉर्म 483 में इसे सूचीबद्ध कर लेता है और विनिर्माताओं से यह सूचना साझा करता है। फिर विनिर्माताओं को अपनी सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई बताते हुए एफडीए को जवाब देना होता है, जिसमें यह आश्वासन दिया जाता है कि वे सीजीएमपी का पालन करेंगे। इसके बावजूद यदि इनका अनुपालन नहीं किया जाता या सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई अपर्याप्त पाई जाती है तो एफडीए एक चेतावनी पत्र या आयात अलर्ट जारी कर सकता है। भारतीय और चीनी फार्मासूटिकल कंपनियों को सबसे ज्यादा आयात अलर्ट मिलते हैं। चेतावनी पत्रों और आयात अलर्ट की सूची में भारत चौथे स्थान पर है। कुल यूएस एफडीए आयात अलर्ट में भारतीय कंपनियों का हिस्सा तीन प्रतिशत है। आयात अलर्ट भारतीय कंपनियों द्वारा क्वालिटी कंट्रोल, हाइजीन, विश्वसनीयता का अभाव और मिलावट एवं डाटा की सटीकता जैसे विभिन्न कथित उल्लंघन करने पर जारी किए जाते हैं। आयात अलर्ट मिलने वाले विनिर्माण संयंत्रों से फार्मासूटिकल उत्पादों के निर्यात पर रोक लग जाती है और प्रभावित पूरे उत्पादन की बिक्री अमेरिकी बाजार में कहीं नहीं होती। इसके अतिरिक्त यदि यूएस एफडीए भारतीय विनिर्माण इकाइयों को आयात अलर्ट जारी करता रहता है तो फार्मासूटिकल उत्पादकों को यूएस एफडीए के जीएमपी दिशानिर्देशों का अनुपालन और ज्यादा सख्ती से करना अनिवार्य हो जाता है। यानी ज्यादा क्वालिटी कंट्रोल, ज्यादा जांच, जिसका परिणाम होता है उस क्षेत्र में ज्यादा निवेश और इस तरह भारतीय फार्मासूटिकल कंपनियों द्वारा दवाइयां बनाने की लागत बढ़ जाती है।


विभिन्न देशों में लागू विनियामकों के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया यह लिंक देखिए http://www.standardsmap.org/identify