पेट्रोलियम उत्पाद


 

संक्षिप्त विवरण

भारत सरकार ने 1990 के दशक के अंत से ही ऊर्जा कंपनियों को रिफाइनरियों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया था। इस तरह देश कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण आयातक होने के बावजूद 2011 में पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बन गया। पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ के अनुसार, रिफाइनरियों और फ्रैक्शनरेटरों द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 254.5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) रहा, जो पिछले साल 242.69 एमएमटी था। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन में 2012-13 से 2017-18 के दौरान 3.2% की सीएजीआर दर्ज की गई।

भारत में रिफाइनिंग क्षमता में अच्छी वृद्धि के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में लगातार तेजी आई है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते हाल के वर्षों में निर्यात प्रभावित हुआ है। कीमतों में गिरावट और बढ़ती प्रतियोगिता के इस चुनौतीपूर्ण परिवेश में, वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में 46.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि के चलते पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में 2016-17 के दौरान 3.6% और 2017-18 के दौरान 18.8% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई और निर्यात 2015-16 के 30.6 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर 2017-18 में 37.4 अरब यूएस डॉलर हो गया। यह भारत के निर्यातों में सबसे बड़ा घटक रहा।

सिंगापुर 16.4% हिस्से के साथ भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक रहा। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (11.9%), अमेरिका (6.9%) और नीदरलैंड (5.8%) का स्थान रहा।

ऑटोमैटिक रूट से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) - तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्रों की खोज, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की मार्केटिंग के लिए बुनियादी ढांचे, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की मार्केटिंग, पेट्रोलियम उत्पादों की पाइपलाइन, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, एलएनजी रिगैसीफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, बाजार अध्ययन, योजना निर्माण और निजी क्षेत्र में पेट्रोलियम रिफाइनिंग में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है, जो सरकार की मौजूदा नीति और तेल मार्केटिंग क्षेत्र के मौजूदा विनियामक तंत्र या तेल की खोज और प्राकृतिक तेल कंपनियों के खोजे गए क्षेत्रों के अधीन है।

ऑटोमैटिक रूट से 49% विदेशी निवेश (एफडीआई) - मौजूदा पीएसयू में घरेलू इक्विटी के विनिवेश के बिना पीएसयू द्वारा पेट्रोलियम रिफाइनिंग के लिए ऑटोमैटिक रूट के जरिए 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 शोधन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, मार्केटिंग और पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की बिक्री का नियमन करता है।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में अप्रैल 2000 और जून 2018 के बीच 7 अरब यूएस डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ।

भारत की तेल मांग 2040 तक 3.6% की सीएजीआर से बढ़ते हुए 458 मिलियन टन तेल समकक्ष (एमटीओई) तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि ऊर्जा की मांग 2040 तक अर्थव्यवस्था में पांच गुना बढ़ोतरी के चलते दोगुनी होने की उम्मीद है।

2040 तक गैस उत्पादन 90 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) को छूने की संभावना है, जो मौजूदा फॉर्मूला में समायोजन के अधीन है जो घरेलू उत्पादकों को दी गई कीमत निर्धारित करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की मांग 4.6% की सीएजीआर से बढ़ते हुए 149 एमटीओई तक पहुंच जाएगी।

विभिन्न रिफाइनरियों द्वारा लगाई जाने वाली कुछ परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, भारत की रिफाइनिंग क्षमता 2019-20 तक सालाना 256.55 एमएमटी तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा, इंडियन ऑयल ने अगले पांच से सात वर्षों के दौरान अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.8 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।


 

चुनिंदा सरकारी पहलें

खोज और उत्पादन

  • सरकार ने हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और लाइसेंस नीति (एचआएलपी- हेल्प) को मंजूरी दे दी है और 30 मार्च 2016 को इसे अधिसूचित भी कर दिया गया है। यह नीति तेल, गैस, कोयला बेड मीथेन, शेल तेल/गैस आदि जैसे सभी हाइड्रोकार्बन उत्पादों के खनन के लिए एक समान लाइसेंसिंग प्रणाली प्रदान करती है। एकल लाइसेंसिंग प्रणाली के अंतर्गत औपचारिक बिड राउंड का इंतजार किए बिना एक्सप्लोरेशन ब्लॉक चुनने का विकल्प है और ऑफशोर ब्लॉक के लिए कम रॉयल्टी दर, मार्केटिंग और मूल्य निर्धारण स्वतंत्रता जैसे कई प्रोत्साहन भी प्रदान करता है और राजस्व साझा मॉडल को परिचालित करना भी आसान है।
  • 2017 में, सरकार ने खोज और उत्पादन संबंधी आंकड़ों को वाणिज्यिक खोज और शोध एवं विकास के लिए उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नेशनल डेटा रिपोजिटरी (एनडीआर) की स्थापना की।
  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन ब्लॉकों को जल्दी शुरू करने के लिए पीएससी व्यवस्था (प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट) के अंतर्गत छूट, विस्तार और स्पष्टीकरण के लिए एक नीतिगत ढांचा बनाया गया, जिसे 10 नवंबर, 2014 को अनुमोदित कर दिया गया।
  • 28 छोटे और मध्यम आकार के एक्सप्लोरेशन ब्लॉकों के लिए प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट को विस्तार देने वाली नीति को 10 मार्च, 2016 को मंजूरी दी गई।
  • एनईएलपी ब्लॉकों में हुई खोजों की परीक्षण नीति को 29 अप्रैल, 2015 को अनुमोदन प्रदान किया गया।
  • निवेशों को प्रत्साहित करने के लिए ओपन एकरिज लाइसेंसिग नीति (ओएएलएपी) – एक्सप्लोरेशन क्षेत्र में नई हेल्प नाम की नई व्यवस्था के हिस्से के रूप में 10 मार्च 2016 के सरकार के एक निर्णय के जरिए ओएएलएपी को शुरू किया गया, ताकि तेल और गैस की खोज की संभावनाओं वाले इलाकों में सर्वे तेजी से किया जा सके।
  • कोल बेड मीथेन पॉलिसी के अंतर्गत सरकार अंततराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बिडिंग के जरिए हेल्प ब्लॉक्स की तर्ज पर पारदर्शी तरीके से सीबीएम ब्लॉकों का आवंटन कर रही है। इस नीति के अंतर्गत सरकार ने 30 सीबीएम ब्लॉकों का आवंटन किया।

प्राकृतिक गैस बाजार

  • नई घरेलू गैस मूल्य निर्धारण नीति के अंतर्गत वैश्विक बाजार से जुड़ा नया गैस मूल्य फॉर्मूला 1 नवंबर, 2014 से लागू किया गया। वैकल्पिक ईंधन की कुल लागत के आधार पर भौगोलिक रूप से जटिल, उच्च जोखिम / उच्च लागत वाले क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए उच्चतम निर्धारित मूल्य के प्रावधान के साथ 10 मार्च, 2016 को मार्केटिंग और मूल्य निर्धारण की छूट दी गई।
  • सभी उर्वरक संयंत्रों को एक मूल्य पर गैस की आपूर्ति करने के लिए यूरिया क्षेत्र में गैस पूलिंग को 31 मार्च, 2015 को मंजूरी प्रदान की गई, ताकि आर-एलएनजी के साथ घरेलू गैस के पूलिंग तंत्र के जरिए यूरिया उत्पादन किया जा सके।

पूर्वोत्तर भारत के लिए हाइड्रोकार्बन नीति

  • पूर्वोत्तर भारत के लिए फरवरी 2016 में हाइड्रोकार्बन नीति 2030 जारी की गई, जिसमें हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम सेक्टर में 2030 तक 20 अरब यूएस डॉलर के निवेश की उम्मीद जताई गई है। पूर्वोत्तर में खोज और उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए इस क्षेत्र में परिचालन करने वाली निजी कंपनियों को गैस ऑपरेशन पर 40% की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018

  • सरकार ने एक नई राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (2018) का अनावरण किया है, जो कई उपायों के माध्यम से जैव ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। प्रमुख उपायों में अतिरिक्त फसल उत्पादन से जैव ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहित करना और अगली पीढ़ी की इथेनॉल रिफाइनरियों की स्थापना के लिए 5000 करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है। विशेष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए इस नीति में जैव ईंधन को विभिन्न समूहों में श्रेणीबद्ध किया गया है, जैसे 1जी (फर्स्ट जेनरेशन), 2जी, 3जी और बायो-सीएनजी।
  • निजी विनिर्माताओं / आपूर्तिकर्ताओं द्वारा रेलवे और राज्य परिवहन निगम जैसे बल्क ग्राहकों को 10 अगस्त, 2015 से बायो-डीजल की सीधी बिक्री की अनुमति प्रदान की जा चुकी है।

शेल गैस और तेल संबंधी नीति

  • शेल गैस और तेल नीति, 2013 के जरिए कंपनियों को अपने पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंसों और पेट्रोलियम खनन लीज में शेल गैस और तेल अधिकारों के लिए भी आवेदन करने की अनुमति है।

 

उपयोगी कड़ियां

Show More +