मीडिया और मनोरंजन


 

संक्षिप्त विवरण

भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा मीडिया और मनोरंजन बाजार है, जहां 850 से अधिक टीवी चैनल और 17,000 से अधिक समाचार पत्र हैं। यह दुनिया के सबसे विविध और वायब्रैंड मीडिया बाजारों में से एक है और हर प्रकार के मीडिया में सकारात्मक विकास की संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र को टीवी, प्रिंट, फिल्माया गया मनोरंजन, डिजिटल मीडिया, एनीमेशन और वीएफएक्स, लाइव इवेंट, ऑनलाइन गेमिंग, होम मीडिया, रेडियो और संगीत जैसे वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। फिक्की-ईवाई की “ए बिलियन स्क्रीन ऑफ अपॉर्चुनिटी- इंडियाज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट सेक्टर” शीर्षक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में इस क्षेत्र में 2017 की तुलना में 13.4% की वृद्धि हुई।

इसके अलावा, अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय विज्ञापन उद्योग चीन के बाद एशिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता विज्ञापन बाजार है। वर्तमान में, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विज्ञापन क्षेत्र का योगदान 0.38% है।

टेलीविजन क्षेत्र मीडिया और मनोरंजन उद्योग में एक प्रमुख क्षेत्र है। यह डिजिटल खंड के बाद विज्ञापन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। टेलीविजन खंड का बाजार 2017 के 9.65 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर 2018 में 10.83 अरब यूएस डॉलर हो गया। पे टीवी बाजार का राजस्व 2001 के बाद से काफी बढ़ा है और वर्ष 2001 से 2018 के दौरान दोगुने से अधिक हो गया है। 

ऑडियो स्ट्रीमिंग बाजार न केवल रेडियो और संगीत टीवी स्टेशनों से खुद को अलग करने की कोशिश में नवाचार कर रहा है, बल्कि सावन, जियो म्यूजिक, गाना, जैसे विभिन्न स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों के माध्यम से भी एक अलग खंड तैयार कर रहा है। संगीत खंड का राजस्व 10.9% की वृद्धि के साथ 2018 में 207.72 मिलियन यूएस डॉलर हो गया।

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में प्रिंट उद्योग दूसरा सबसे बड़ा उद्योग रहा, जिसका इस क्षेत्र में हिस्सा 2016-17 के 4.60 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर 2017-18 में 4.95 अरब यूएस डॉलर हो गया और इसमें 3.9% की वृद्धि दर्ज की गई। भारत में अखबारों की पाठक संख्या 40% की वृद्धि के साथ 2017 में 407 मिलियन हो गई, जो 2014 में 295 मिलियन थी। आय में वृद्धि और जीवनशैली विकसित होने से आला पत्रिकाओं के खंड में भी मजबूत वृद्धि हुई है।

डिजिटल वीडियो की बढ़ती खपत से दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म स्टूडियोज के लिए विकास के नए अवसर बन रहे हैं। इनमें से कई स्टूडियो तो पहले से ही भारत में स्थापित हो चुके हैं या भारत के विभिन्न स्टूडियो के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय फिल्मोद्योग दुनियाभर में फिल्मों का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है, जहां 400 प्रोडक्शन हाउस और कॉर्पोरेट हाउस फिल्म निर्माण के काम में लगे हैं। भारतीय फिल्म उद्योग 2016-17 में 2.16 अरब यूएस डॉलर का था, जो 1.47% की वृद्धि के साथ 2.47 अरब यूएस डॉलर का हो गया। भारतीय बॉक्स ऑफिस और 3डी सिनेमा में हॉलीवुड कंटेंट की बढ़ती हिस्सेदारी देश में डिजिटल स्क्रीन के विकास को बढ़ा रही है। फिल्मों को थियेटर में रिलीज करना अब जरूरी नहीं रहा है और भारतीय फिल्म निर्माता विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्मों के लिए फिल्में बना रहे हैं।

दूसरी ओर, आउट ऑफ होम (ओओएच) मनोरंजन के बाजार का आकार 2016-17 के 426.29 मिलियन यूएस डॉलर से बढ़कर 2017-18 में 496.51 मिलियन यूएस डॉलर हो गया और पिछले वर्ष की तुलना में 16.4% की वृद्धि हुई। भारत में 2017-18 में रेडियो उद्योग का बाजार मूल्य 401.86 मिलियन यूएस डॉलर रहा, जो 2016-17 में 357.73 मिलियन यूएस डॉलर था। आउट ऑफ होम मनोरंजन खंड में विज्ञापन पर खर्च करने के मामले में खुदरा, उपभोक्ता सेवाएं और रियल एस्टेट क्षेत्र शीर्ष पर रहे। डिजिटल आउट ऑफ होम बाजार 2017-18 में 1.5 अरब रुपये तक का हो गया, जिसका समग्र बाजार में 4.7% योगदान रहा।

भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग की लाइफलाइन कहे जाने वाले विज्ञापन क्षेत्र का जीडीपी के प्रतिशत के रूप में व्यय सबसे कम है। वायरलैस ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में भारत एक अहम मोड़ पर है, जो अपने जीडीपी विकास और युवा जनसांख्यिकी के साथ नए अवसर प्रदान करता है।

छोटे और मध्यम उद्यम एसएमई के विज्ञापन आमतौर पर येलो पेजेज या स्थानीय प्रिंट, ओओएच और रेडियो पर सीमित संख्या में दिए जाते हैं। बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ, मार्केटिंग और प्रचार गतिविधियों के लिए मुख्य रूप से गूगल और फेसबुक का प्रयोग एसएमई क्षेत्र को डिजिटल मीडिया में प्रवेश के लिए व्यापक दायरा प्रदान करता है।

फिक्की-ईवाई की “ए बिलियन स्क्रीन ऑफ अपॉर्चुनिटी- इंडियाज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट सेक्टर” शीर्षक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक ऑनलाइन आबादी 60% से अधिक होने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर 5जी सेवाएं लॉन्च होने के साथ ही मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोक्ताओं के 2022 तक 70% से अधिक हो जाने की उम्मीद है। ट्राई टैरिफ ऑर्डर से कुल दर्शकों की संख्या, मुफ्त टीवी अपटेक, चैनल एमआरपी दरों और विज्ञापन राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसी रिपोर्ट के अनुसार, टीवी और ओटीटी कंटेंट में समानता के चलते ओटीटी प्लेटफॉर्मों को लाभ मिलना तय है। चूंकि बड़े प्रसारकों ने फ्री डिश से अपना कंटेंट हटा लिया है, अतः ओटीटी प्लेटफॉर्मों को इसका लाभ मिल सकता है।

कुल मिलाकर 2018-2021 के बीच मीडिया और मनोरंजन उद्योग के 21% की सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है।

रेडियोः निजी एफएम चैनलों सहित रेडियो में एफडीआई की सीमा 26% से बढ़ाकर 49% कर दी गई है। निजी ऑपरेटरों को शहर में कई चैनलों के मालिक होने की अनुमति है, जो शहर के कुल चैनलों के 40% की सीमा के अधीन हैं।

टेलीविजनः डीटीएच सैटेलाइट और डिजिटल केबल नेटवर्क के लिए 100% एफडीआई की अनुमति है। समाचार और समसामयिक चैनलों को छोड़कर टीवी चैनलों के अप-लिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए विदेशी निवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

फिल्मः सरकार द्वारा ऑटोमैटिक रूट से 100% तक की एफडीआई की अनुमति दी गई है।

प्रिंटः समाचार पत्र और पत्रिकाओं के प्रकाशन क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय फर्मों में 26% तक के एफडीआई / एनआरआई निवेश की अनुमति है। विदेशी पत्रिकाओं के भारतीय संस्करणों के प्रकाशनों में 26% तक के एफडीआई / एनआरआई निवेश की अनुमति है। वैज्ञानिक और तकनीकी पत्रिकाओं / विशेष पत्रिकाओं / पत्रिकाओं के प्रकाशनों में 100% तक के एफडीआई / एनआरआई निवेश की अनुमति है।

एनीमेशन, गेमिंग और वीएफएक्स (एजीवी) : ऑटोमैटिक रूट से इस क्षेत्र में 100% तक एफडीआई की अनुमति है, बशर्ते कि यह आरबीआई दिशानिर्देशों के अनुपालन में हो।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2018 के दौरान, सूचना और प्रसारण (प्रिंट मीडिया सहित) में एफडीआई आवक सेक्टर 7.50 अरब यूएस डॉलर पहुंच गई। कुल एफडीआई आवक में इसका योगदान 1.83% का रहा।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • दूरसंचार विभाग ने 26 सितंबर, 2018 को “डिजिटल संचार नेटवर्क की परिवर्तनकारी शक्ति को अनलॉक” करने के लिए, डिजिटल सशक्तीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 जारी की; और इस छोर की ओर, लक्ष्यों, पहलों, रणनीतियों और इच्छित नीति परिणामों के एक सेट को रेखांकित करने का प्रयास करता है।
  • अमेजॉन एलेक्सा स्मार्ट स्पीकर पर ऑल इंडिया रेडियो स्ट्रीमिंग सेवाएं शुरू की गईं, जो संचार के पुराने और आधुनिक रूपों का तालमेल है। इस पहल से भारतीय प्रवासियों को भी फायदा होगा क्योंकि अब दुनिया के किसी भी हिस्से से कोई भी एलेक्सा के माध्यम से ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रम सुन सकता है। दूरदर्शन के 9 डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गैदरिंग वैन शुरू की गईं, ताकि पूर्वोत्तर भारत के विकास की कहानियां देशभर के लोगों तक पहुंचाई जा सकें। इनमें से 4 गंगटोक, कोहिमा, इंफाल और अगरतला के लिए हैं।
  • विकास पत्रकारिता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य करने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए दीनदयाल उपाध्याय छात्रवृत्ति की घोषणा की गई।
  • भारत और इजरायल के बीच फिल्म सह-उत्पादन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता कला और संस्कृति के पारस्परिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने, और फिल्म निर्माण के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच सद्भावना और बेहतर समझ विकसित करने लिए किया गया है। इस समझौते से कलात्मक, तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मियों के लिए रोजगारों के अवसरों के सृजन में भी मदद मिलेगी।
  • अलग-थलग तरीकों से काम कर रही मीडिया इकाइयों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी), फील्ड पब्लिसिटी निदेशालय (डीएफपी) और गीत एवं नाटक प्रभाग का विलय कर ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन का गठन किया गया।
  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने निजी टीवी चैनलों को ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन द्वारा दी जाने वाली विज्ञापन दरों में 11%की वृद्धि की है। समाचार चैनलों के लिए लागू दरें देश में उनकी समग्र पहुंच के आधार पर अलग-अलग होंगी।