खाद्य प्रसंस्करण उद्योग


 

संक्षिप्त विवरण

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्पादन, विकास, खपत और निर्यात के मामले में भारत के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है और इस क्षेत्र को भारत सरकार द्वारा प्राथमिक दर्जा प्राप्त है। भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग देश के कुल खाद्य बाजार का 32%, भारत के निर्यात का 13% और कुल औद्योगिक निवेश का 6% हिस्सा रखता है। भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में फल और सब्जियां, मसाले, मांस और पोल्ट्री, दूध और दुग्ध उत्पाद, मादक और गैर मादक पेय पदार्थ, मत्स्य पालन, वृक्षारोपण, अनाज प्रसंस्करण और मिष्ठान्न भंडार, चॉकलेट तथा कोकोआ उत्पाद, सोया आधारित उत्पाद, मिनरल वाटर और उच्च प्रोटीन युक्त आहार जैसे अन्य उपभोक्ता उत्पाद समूहों को शामिल किया गया।

2016-17 के दौरान भारत से प्रसंस्कृत खाद्य का निर्यात 30.9 अरब यूएस डॉलर का रहा, जिसमें 4 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई। निर्यात में 6.7 प्रतिशत की सीएजीआर से गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निर्यात मूल्य 2013-14 के 38.1 अरब यूएस डॉलर से गिरकर 2016-17 के दौरान करीब 30.9 अरब यूएस डॉलर ही रह गया।

  
भारत से प्रसंस्कृत खाद्य का निर्यात
एचएस कोड 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17
2 4475.7 4929.3 4210.0 4037.6
3 4823.2 5249.5 4486.3 5501.1
4 705.1 379.0 328.5 292.9
7 1356.1 1180.8 1261.4 1294.7
8 1623.4 1610.7 1584.7 1731.2
9 2746.7 2871.9 2954.9 3185.2
10 10563.3 9551.0 6272.0 6013.0
11 299.1 305.6 299.5 218.0
12 1709.5 2213.9 1673.5 1809.0
13 2414.9 1947.5 869.0 844.4
15 857.4 973.3 877.3 892.6
16 119.7 155.4 212.0 317.3
17 1355.0 1075.2 1763.6 1508.5
18 94.0 138.9 193.3 162.2
19 463.3 489.8 506.2 519.1
20 449.7 504.7 488.3 493.8
21 540.1 587.5 568.8 628.2
22 409.0 377.8 320.5 312.0
23 3047.8 1630.1 802.7 1110.8
कुल 38052.9 36172.0 29672.4 30871.5
स्रोत: डीजीसीआईएस
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है।
  • व्यापार के लिए सरकारी अनुमोदन रूट से भी 100% एफडीआई की अनुमति है, जिसमें भारत में निर्मित और/या उत्पादित खाद्य उत्पादों का ई-कॉमर्स के जरिए व्यापार भी शामिल है।

खाद्य संरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट (टीक्यूएम) जैसे विशेष तंत्र बनाए गए हैं। इनमें आईएसओ 9000, आईएसओ 22000, एचएसीसीपी- खाद्य पदार्थों में हानिकारक तत्त्वों की जांच के लिए हैजर्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट्स, श्रेष्ठ विनिर्माण पद्धतियां (जीएमपी) और श्रेष्ठ स्वच्छता पद्धतियां (जीएचपी) शामिल हैं, जिनका लाभ खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मिलता है। इससे गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों का अनुपालन करने में मदद मिलती है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य संरक्षण के साथ-साथ उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का बेहतर तरीके से सामना करने में सहयोग मिलता है। इसके साथ ही विदेशों में उत्पाद की स्वीकृति भी बढ़ जाती है तथा उद्योग भी प्रौद्योगिकी के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर के होते हैं।


 

कुछ चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की वृद्धि में तेजी लाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने खाद्य उत्पादों की मार्केटिंग में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है। इसके साथ ही सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर अन्य विभिन्न प्रोत्साहन भी दिए जाते हैं।
  • केंद्रीय बजट 2017-18 में भारत सरकार ने 8,000 करोड़ रुपए (1.2 अरब यूएस डॉलर) की राशि से डेयरी प्रसंस्करण इंफ्रा फंड बनाया है।
  • भारत सरकार ने इस क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियम नरम किए हैं। खाद्य उत्पाद ई-कॉमर्स में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है।
  • भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की योजना भारत में खाद्य परीक्षण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 482 करोड़ रुपए (72.3 मिलियन यूएस डॉलर) का निवेश करने की है। इसके लिए 59 मौजूदा खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन और 62 नई प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है।
  • भारतीय उर्वरक एवं पोषक तत्त्व अनुसंधान परिषद (आईसीएफएनआर) द्वारा उर्वरक क्षेत्र में अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को अपनाया जाएगा। इससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले उर्वरक किफायती दाम में सुलभ हो सकेंगे और आम आदमी के लिए खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मानव संसाधन विकास (एचआरडी) के लिए एक योजना की घोषणा की है। एचआरडी योजना को खाद्य प्रसंस्करण राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत राज्य सरकारों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस योजना के चार प्रमुख पहलू हैं:
    • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में डिग्री / डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण
    • उद्यमिता विकास कार्यक्रम
    • खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण केंद्र
    • राज्य / राष्ट्रीय स्तर के मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रशिक्षण

 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियामक

आईएफएस खाद्य मानक, अंब्रेला ब्रांड आईएफएस (इंटरनेशनल फीचर्ड स्टैंडर्ड) से संबंधित मानकों में से एक है। यह खाद्य सुरक्षा की जांच और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक वैश्विक खाद्य सुरक्षा पहल (जीएफएसआई) है। यह खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों या खुले खाद्य उत्पाद पैक करने वाली कंपनियों से संबंधित है। आईएफएस खाद्य मानक उत्पादों के प्रसंस्करण के दौरान अथवा प्राथमिक पैकिंग के दौरान उत्पाद के खराब होने जैसी घातक स्थिति में लागू होते हैं। मानकों में विनिर्देशों के अनुपालन से संबंधित विभिन्न अपेक्षाएं पूरी करनी जरूरी होती हैं और ये मानक ब्रांड की सुरक्षा तथा गुणवत्ता के लिए उत्पादन एवं उत्पाद की मार्केटिंग में सहायक होते हैं। आईएफएस मानक संस्करण 6 दुनिया भर के खाद्य प्रमाणन निकायों, खुदरा विक्रेताओं, उद्योग और खाद्य सेवा कंपनियों की पूर्ण और सक्रिय भागीदारी से विकसित किए गए हैं।

एफएसएसएआई एक सांविधिक निकाय है जो खाद्य पदार्थों के लिए वैज्ञानिक आधार वाले मानक तय करता है और उनके विनिर्माण, प्रसंस्करण, वितरण, बिक्री, आयात एवं निर्यात का विनियमन करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खाना सुरक्षित है और इंसान के लिए स्वास्थ्यकर है। अधिनियम के तहत खाद्य सुरक्षा और मानकों से संबंधित सभी मामलों के लिए एक एकल विनियामक प्राधिकरण की स्थापना की गई है, जो बहु-स्तरीय और बहु-विभागीय नियंत्रण से लेकर सिंगल लाइन कमांड से होकर गुजरता है।

भारतीय बाजार में उतारे गए खाद्य उत्पादों पर नियंत्रण रखने के लिए एफएसएसएआई भी कोडेक्स अलामेंटेरिअस का अनुपालन करता है, जिसे खाद्य सुरक्षा के दिशानिर्देशों के रूप में एफएओ और डब्ल्यूएचओ ने 2003 में प्रकाशित किया था। स्वास्थ्य को नुकसान होने से रोकने/बचाने के लिए हजार्ड एनालिस्स क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट (एचएसीसीपी) सिस्टम नाम से एक नया गुणवत्ता आश्वासन सिद्धांत शुरू किया गया है। एचएसीसीपी सिस्टम खाद्य प्रसंस्करण अर्थात् कच्चे माल, भोजन भंडारण, वितरण चैनलों और उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल होने वाले अंतिम उत्पाद तक सभी चरणों में शामिल होता है।


विभिन्न देशों में लागू विनियामकों के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया यह लिंक देखिए:http://www.standardsmap.org/identify