इलेक्ट्रॉनिक्स


 

संक्षिप्त विवरण

तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था, युवा पढ़ी की महत्वाकांक्षाओं और भारत में बड़े मध्यवर्ग की बढ़ती आय के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर की घरेलू मांग बढ़ रही है। इसलिए देश में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर उत्पादन के कारोबार में उतरने का यह अच्छा अवसर है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विकसित करने और उनका निविनिर्माण करने तथा आने वाले समय में सूचना, संचार और मनोरंजन के बदलते क्षेत्रों में देश की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर उत्पादन में अपनी वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाने की भी अपार संभावनाएं हैं।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर माल का उत्पादन 2020 तक 104 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का कारोबार इसके मुख्य घटकों के साथ-साथ विभिन्न धाराओं में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में उत्पादन का वर्तमान में उपलब्ध डाटा विभिन्न उद्योग महासंघों द्वारा दी गई सूचनाओं तक ही सीमित है।

मद 2012-13 2013-14 2014-15 * 2015-16*
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स 40447 47599 55806 -
औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स 25800 33600 39374 45083
ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स 5629 7278 NA -
कंप्यूटर हार्डवेयर 9376 17484 18691 -
मोबाइल फोन 34600 26650 18900 54000
स्ट्रेटजिक इलेक्ट्रॉनिक्स 9000 13800 15700 -
इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे 26645 32102 39723 -
एलईडी 1275 1941 2172 3590
*- अनुमान संबंधित उद्योग महासंघों द्वारा प्रदान की गई सूचना के अनुसार।स्रोतः इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक माल क्षेत्र बीते कुछ वर्षों से मंद पड़ा है। पिछले साल धीमी विकास दर के बावजूद, 2011-12 और 2015-16 के दौरान निर्यात अच्छा रहा और इसमें समग्र रूप से 42.5 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज की गई। हालांकि आयात इससे लगभग दोगुनी 87.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा।

अप्रैल 2016 से जून 2016 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स के भारत के निर्यात में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 6.4 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई और 1.4 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ, जिसका देश के कुल निर्यात में 2.2 प्रतिशत हिस्सा रहा। इसी अवधि के दौरान आयात 8.8 बिलियन यूएस डॉलर का रहा, जिसमें 4.2 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई। देश के कुल आयात में इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का 10.5 प्रतिशत हिस्सा रहा।

2015-16 के दौरान भारतीय इलेक्ट्रॉनिक माल प्रमुख रूप से अमेरिका (14.5 प्रतिशत हिस्सा), संयुक्त अरब अमीरात (9.3 प्रतिशत), जर्मनी (4.9 प्रतिशत), चीन (3.6 प्रतिशत) और फ्रांस (3.3 प्रतिशत) को निर्यात किया गया। वहीं, भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स माल का सबसे ज्यादा 54.9 प्रतिशत चीन से आयात किया गया। आयात के अन्य प्रमुख स्रोत देश दक्षिण कोरिया (7.8 प्रतिशत), अमेरिका (7 प्रतिशत), जर्मनी (3.5 प्रतिशत), मलेशिया (3.3 प्रतिशत) और सिंगापुर (3.2 प्रतिशत) रहे।

सरकार ने इस क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी है। ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत औद्योगिक लाइसेंस, तकनीकी जानकारी फीस और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए रॉयल्टी की जरूरत नहीं है। अप्रैल 2000 से सितंबर 2015 के दौरान भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में करीब 1,636.0 मिलियन यूएस डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जो देश में हुए कुल एफडीआई का 0.6 प्रतिशत रहा।

2018 तक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर उद्योग के 112-130 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचने के आसार हैं, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर विनिर्माता भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां बढ़ाना चाहते हैं, ताकि घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के साथ-साथ मध्य पूर्व, अफ्रीका और सार्क देशों के बाजारों की मांग भी पूरी की जा सके#।

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) बाजार के 2015 के 94 बिलियन यूएस डॉलर से बढ़कर 2020 में 400 बिलियन यूएस डॉलर होने का अनुमान है##। इस बीच, सेमिकंडक्टरों की खपत भी 26.72 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ते हुए 2013 के 10.02 बिलियन यूएस डॉलर से 2020 में 52.58 बिलियन यूएस डॉलर तक होने का अनुमान है$$।

बढ़ते उपभोक्ता आधार और उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती मांग के चलते भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। केबल के डिजिटलीकरण से देश में ब्रॉडबैंड की मांग भी बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में संलग्न कंपनियों के लिए नए अवसर बनेंगे।

[# - एसोचैम और अर्नेस्ट एंड यंग द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक। ##- इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईएसए) द्वारा की गई ‘इंडियन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) डिसएबिलिटी आइडेंटिफिकेशन स्टडी।’ $$- नोवोनोअस ‘सेमीकंडक्टर मार्केट इन इंडिया 2014-2020’ की एक रिपोर्ट के अनुसार।]


 

कुछ सरकारी प्रोत्साहन

  • कुछ निश्चित स्पेसिफिकेशन के साथ डिजिटल स्टिल इमेज वीडियो कैमरा पर कोई सीमा शुल्क नहीं है।
  • पीवी सोलर सेल विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले राउंड कॉपर वायर और टिन अलॉय पर कोई उत्पाद शुल्क नहीं है।.
  • एलसीडी/एलईडी टीवी पैनलों के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले ब्लैक लाइट मॉड्यूल पर कोई सीमा शुल्क नहीं है।
  • ऑर्गैनिक एलईडी (ओएलईडी) टीवी पैनलों पर कोई सीमा शुल्क नहीं है।
  • स्मार्ट कार्ड के लिए आईसी मॉड्यूल विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले वैफर्स पर सीमा शुल्क 12% से घटाकर 6% कर दिया गया है।
  • एलईडी लाइट, फिक्सचर और एलईडी लैंप के लिए एलईडी ड्राइवर और एमसीपीसीबी विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले माल पर सीमा शुल्क 12% से घटाकर 6% कर दिया गया है।
  • टैबलेट कंप्यूटरों पर सीमा शुल्क 12% से घटाकर 2% कर दिया गया है, 12.5% सेनवैट क्रेडिट के साथ।
  • पेसमेकर विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। .
  • 10 साल के कैपेक्स के लिए 20-25% तक कैपिटल सब्सिडी।
  • गैर-एसईजेड इकाइयों में कैपिटल इक्विपमेंच के लिए सीवीडी/ सीमा शुल्क की प्रतिपूर्ति।
  • फैब और एटीएमपी जैसी चुनिंदा हाई टेक इकाइयों में 10 साल के लिए केंद्रीय करों और शुल्कों की प्रतिपूर्ति।
  • चिह्नित इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की पूरी वेल्यू चेन के लिए उपलब्ध।
  • अनुमोदन की तारीख से 10 वर्ष के लिए इन्सेंटिव उपलब्ध।
  • 50-75% सब्सिडी – प्रति 100 एकड़ भूमि पर 10 मिलियन यूएस डॉलर तक।
  • ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह की परियोजनाओं पर लागू।
  • संबंधित अधिनियमों में बताए अनुसार एसईजेड/एनआईएमजेड में स्थित इकाइयों अथवा उत्तर-पूर्व, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे विशेष क्षेत्रों में परियोजनाएं लगाने के लिए इन्सेंटिव।
  • ईएसडीएम क्षे6 में एमएसएमई को सहयोग करने के लिए राष्ट्रीय योजना।
  • निर्यात के लिए इलेक्ट्रॉनिक माल के भारतीय मानकों, टेस्टिंग और प्रमाणीकरण दोनों का अनुपालन जरूरी है।
  • एमएसएमई द्वारा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टरों का विकास।

 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियामक

यूरोपीय संघ (ईयू) में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक माल बेचने वाली कंपनियों को इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट (ईईई) के लिए ईयू कानून का पालन करना अनिवार्य है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वेस्ट इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक डायरेक्टिव (डब्ल्यूईईई), जिसके जरिए ईईई उत्पादकों की ईईई उत्पादों की मियाद पूरी होने पर उस कचरे को जुटाना और उसे रिसाइकल करने के संबंध में वित्तीय एवं अन्य जिम्मेदारियां तय होती हैं।
  • रिकंस्ट्रक्शन ऑफ हैज़र्ड्स सब्सटैंसेज डायरेक्टिव (आरओएचएस), जो ईईई में सीसा, पारा, कैडमियम, हेक्ज़ावैलेंट क्रोमियम और कुछ पोलीब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स जैसे खतरनाक पदार्थों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाते हैं।

चीन आरओएचएस: "इलेक्ट्रॉनिक जानकारी उत्पादों के प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपाय, जिन्हें सामान्यतः आरओएचएस के रूप में जाना जाता है", इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में खतरनाक पदार्थों के उपयोग को रोकने के लिए हैं। 1 मार्च, 2007 को या इसके बाद से चीन में बिक्री के लिए निर्मित सभी उत्पादों को चरण 1 की अपेक्षाओं का पालन करना जरूरी है।

दोबारा निर्यात या अन्य निर्यात उत्पादों के विनिर्माण के लिए देश में आयातित उत्पाद इसमें शामिल नहीं हैं। निम्न अपेक्षाओं को पूरा करना आवश्यक है:

  • सीसा, हेक्ज़ावैलेंट क्रोमियम, पारा, कैडमियम, पोलीब्रोमिनेटेड बायफेनिल और पोलीब्रोमिनेटेड डायफेनिल ईथर (पीबीडीई) जैसे खतरनाक पदार्थ इसके दायरे में आते हैं। यदि किसी ईआई में इनमें से कोई पदार्थ नहीं है तो निम्नलिखित प्रतीक चिह्न इस्तेमाल करना जरूरी होता हैः
  • यदि उपरोक्त में से कोई भी घातक पदार्थ अधिकतम संकेंद्रण मात्रा से ज्यादा है, तो निम्नलिखित प्रतीक लगाना जरूरी है। इसमें भीतर की ओर लिखी संख्या पर्यावरण के अनुकूल इस्तेमाल की अवधि बताता है:
  • यदि उत्पाद में घातक पदार्थ अधितकम संकेंद्रण मात्रा से अधिक हैं तो ईआईपी के यूजर मैनुअल में टॉक्सिक और घातक पदार्थों का नाम व कंटेंट होना चाहिए। चीन में कैडमियम को छोड़कर सभी घातक पदार्थों के लिए अधितकम संकेंद्रण मात्रा 0.1 प्रतिशत है। कैडमियम के लिए यह मात्रा 0.01 प्रतिशत है। .
  • ईआईपी की पैकेजिंग जीबी18455- 2001 स्टैंडर्ड के अनुरूप होनी चाहिए।

चीन में उत्पादों को निर्यात करने या वहां बिक्री से पहले निर्माताओं को अपने उत्पादों के लिए चीन अनिवार्य प्रमाणीकरण (सीसीसी) मार्क हासिल करना आवश्यक है। कई इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए सीसीसी मार्क जरूरी है।

दक्षिण कोरिया ने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और वाहनों की रिसोर्स रिसाइकलिंग के लिए 2 अप्रैल, 2007 से इस कानून को लागू किया है। इसमें आरओएचएस और डब्ल्यूईईई के पहलू समाहित हैं।

विभिन्न देशों में लागू विभिन्न विनियामकों पर अधिक जानकारी के लिए कृपया यह लिंक देखें: http://www.standardsmap.org/identify