रक्षा विनिर्माण क्षेत्र


 

अवलोकन

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य शक्ति वाला देश है और रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। रक्षा उत्पादन का आधुनिकीकरण करना और इस मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। इस क्षेत्र को निजी विनिर्माताओं के लिए भी खोला जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ रहा है।

भारत के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र को लगभग 34.53 अरब यूएस डॉलर आवंटित किया गया और रक्षा बजट का 31.1% विभिन्न रक्षा उपकरणों की खरीद पर खर्च किया जाता है। रक्षा संबंधी 60% आवश्यकताओं को आयात से पूरा किया जाता है। यानी रक्षा क्षेत्र में आयात के विकल्प स्थापित करने के भरपूर अवसर हैं।

अगले पांच वर्षों में, सरकार सैन्य आधुनिकीकरण पर लगभग 130 अरब यूएस डॉलर खर्च करना चाहती है। इससे विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ रणनीतिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त होगा। रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) और निजी रक्षा उद्योग को विदेशों में व्यवसाय अवसरों की तलाश को सुगम बनाने के उद्देश्य से रक्षा निर्यात रणनीति बनाई गई है। वर्ष 2015-16 के बीच दुनिया के 28 देशों में लगभग 317 मिलियन यूएस डॉलर के मेड-इन-इंडिया रक्षा प्लेटफॉर्म, उपकरण और स्पेयर निर्यात किए गए थे।

बजट 2017-18 में 13.3 अरब यूएस डॉलर के पूंजीगत व्यय के साथ रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 41 अरब यूएस डॉलर आवंटित किया गया है, जो कुल बजट का 31.7% है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए भारतीय सेना के लिए स्वीकृत कुल बजट 62.8 अरब यूएस डॉलर है। यह वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए कुल केंद्रीय सरकारी व्यय का 12.1% है। वर्ष 2017 में वैश्विक सैन्य व्यय में भारत का हिस्सा लगभग 3.7% रहा।

2017-18 (बीई) के कुल रक्षा खर्चों के प्रतिशत के रूप में सेवावार / विभागवार आवंटन :

  • सेना: 55.9%
  • नौसेना: 14.6%
  • वायु सेना: 22.5%
  • डीजीओएफ (ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के महानिदेशालय): 0.8%
  • डीजीक्यूए (गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशक): 0.5%
  • आर एंड डी: 5.7%

वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए डीपीएसयू, ऑर्डिनैंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) और निजी रक्षा उद्योग (जारी किए गए एनओसी के आधार पर) द्वारा संयुक्त निर्यात 1,495.27 करोड़ रुपए का था।

निजी क्षेत्र की लगभग 15-16 कंपनियों ने रक्षा निर्यात में योगदान दिया है। रक्षा उत्पादों के प्रमुख निर्यात स्थलों में इटली, मालदीव, श्रीलंका, रूस, फ्रांस, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, इज़रायल, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, इथियोपिया, सऊदी अरब, फिलीपींस, पोलैंड, स्पेन और चिली आदि शामिल हैं। निर्यात की जाने वाली प्रमुख रक्षा वस्तुओं में व्यक्तिगत सुरक्षा आइटम, ऑफशोर पेट्रोल वेसल, एएलएच हेलीकॉप्टर, एसयू एवियोनिक्स, भारती रेडियो, तटीय निगरानी प्रणाली, क्वैच मॉड II लॉन्चर और एफसीएस, रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और लाइट इंजीनियरिंग मैकेनिकल पार्ट्स आदि शामिल हैं।

सरकारी रूट के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई की अनुमति है। इससे आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। ऑटोमैटिक रूट के तहत 49% तक एफडीआई की अनुमति है। रक्षा उद्योग भी (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत औद्योगिक लाइसेंस के अध्यधीन है और छोटे शस्त्रों का विनिर्माण शस्त्र अधिनियम, 1959 के अध्यधीन है। रक्षा क्षेत्र के लिए एफडीआई में इक्विटी हस्तांतरण पर तीन साल की लॉक-इन अवधि में छूट दी गई है। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई अन्य सुरक्षा शर्तों के अध्यधीन है।

अप्रैल 2000-दिसंबर 2017 तक कुल 532,552 मिलियन यूएस डॉलर के एफडीआई में से रक्षा उत्पादन उद्योगों में लगभग 5.1 मिलियन यूएस डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।

भारत की मौजूदा रक्षा संबंधी आवश्यकताएं आयात काफी हद तक आयात के जरिए पूरी होती हैं। रक्षा क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने से विदेशी उपकरण निर्माताओं को भारतीय कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी करने और घरेलू बाजारों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे घरेलू क्षमता निर्माण में सहयोग के अलावा दीर्घावधि में निर्यातों को भी मजबूती मिलेगी। 'मेक इन इंडिया' रिपोर्ट के अनुसार अगले 5-6 वर्षों में लगभग 4.53 अरब यूएस डॉलर का कॉन्ट्रैक्चुअल ऑफसेट दायित्व है।

विदेशी रक्षा कंपनियों से उपकरणों की खरीद के लिए ऑफसेट पॉलिसी (जिसके अनुसार 306.69 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक के रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए न्यूनतम 30% ऑफसेट अपेक्षित है) निर्धारित की गई है। इससे घरेलू स्तर पर आपूर्तिकर्ताओं का एक इकोसिस्टम विकसित होगा। अनुकूल सरकारी नीति रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, प्रौद्योगिकी उन्नयन और रक्षा क्षेत्र में निर्यात के लिए क्षमता विकास को बढ़ावा देती है।

देश की सुरक्षा के साथ देश की व्यापक आधुनिकीकरण योजनाएं भारत को रक्षा क्षेत्र में एक स्रोत के केंद्र के रूप में विकसित होने में सहायक होंगी।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

केंद्रीय बजट 2016-17 में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए थे। उनमें से कुछ हैं –

Some other government policies include –

  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के केंद्रीय बजट में रक्षा सेवाओं के लिए 34.53 अरब यूएस डॉलर का प्रावधान।
  • 2016-17 में रक्षा के लिए पूंजीगत व्यय 12.09 अरब यूएस डॉलर रखा गया।
  • इसमें से रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए 10.75 अरब यूएस डॉलर की राशि आवंटित की गई।
  • सेना, नौसेना, जॉइंट स्टाफ और वायु सेना के पूंजीगत व्यय के लिए "उपकरणों की खरीद के अलावा" खंड के तहत 1.33 अरब यूएस डॉलर की राशि प्रदान की गई।
  • निम्नलिखित दो में से किसी एक कटौती का लाभ उठाया जा सकता है :
    • * 01.04.2013 से 31.03.2015 के बीच 15.38 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक राशि के अधिग्रहण किए गए और स्थापित किए गए संयंत्रों तथा मशीनरी के लिए विनिर्माण कंपनियों को 15% की दर से निवेश भत्ता (अतिरिक्त मूल्यह्रास), बशर्ते कि इस अवधि के दौरान नए संयंत्र और मशीनरी में निवेश 15.38 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक हो।
    • * किसी वस्तु के निर्माण में लगी कंपनियों को प्रोत्साहन के लिए, नए संयंत्रों और मशीनरी की लागत के 15% की अतिरिक्त कटौती का उपरोक्त लाभ, 31.3.2017 से पहले की गई 3.84 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक की खरीद पर लागू होगा।
  • आयकर अधिनियम की धारा 35 (2 एए) के तहत भारित कर कटौती दी जाती है।
  • इन-हाउस आर एंड डी केंद्र के निर्माण में लगी कंपनियों को पूंजीगत और राजस्व दोनों तरह के खर्च पर आयकर अधिनियम की धारा 32 (2एबी) के अंतर्गत 200% की भारित छूट दी जाती है। जमीन और इमारत पर खर्च को इस छूट में शामिल नहीं किया जाता।
  • नई विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के अनुसार प्रोत्साहन।

 

चुनिंदा बाजार विनियम

यूएस- डायरेक्टरेट ऑफ डिफेंस ट्रेड कंट्रोल्स (डीडीटीसी) रक्षा संबंधी वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात और अस्थायी आयात के लिए उत्तरदायी है और आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट (एईसीए) तथा एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13637 के अधीन है। द इंटरनेशन ट्रैफिक इन आर्म्स रेगुलेशंस ("आईटीएआर, " 22 सीएफआर 120-130) द्वारा एईसीए को लागू किया गया है।

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें: : https://www.pmddtc.state.gov/?id=ddtc_public_portal_compliance_landing

यूके- यूके सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए कुछ निश्चित अंतरराष्ट्रीय व्यापार विनियम निर्धारित किए हैंसैन्य वस्तुओं के आयात अथवा निर्यात पर ये विनियम, प्रभार और प्रतिबंध क्या हैं और सही लाइसेंस के लिए किस प्रकार आवेदन किया जा सकता है, यह निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखा जा सकता हैः :

https://www.gov.uk/guidance/aerospace-and-defence-import-and-export-regulations#duty-reliefs-for-imports-of-aerospace-and-defence-products