निर्माण क्षेत्र


 

परिदृश्य

निर्माण क्षेत्र में रियल एस्टेट और शहरी विकास खंड शामिल हैं। रियल एस्टेट में आवासीय, कार्यालय, खुदरा, होटल और पार्क आदि आते हैं। जबकि, शहरी विकास खंड व्यापक रूप से जल आपूर्ति, स्वच्छता, शहरी परिवहन, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवा जैसे उप-खंडों को मिलाकर बनता है। वर्ष 2017 में भारतीय निर्माण उद्योग लगभग 136 अरब यूएस डॉलर का आंका गया। निर्माण क्षेत्र अन्य विनिर्माण उद्योगों से भी जुड़ा है, जिनमें इसकी अच्छी-खासी हिस्सेदारी है। इस्पात उद्योग में इस क्षेत्र की 55%, पेंट उद्योग में 15% और कांच उद्योग में 30% हिस्सेदारी है। देश के जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 8% रहा है। भारतीय निर्माण क्षेत्र में 2011-15 के दौरान 2.9% की तुलना में 2016-20 के दौरान 5.6% की वृद्धि होने की उम्मीद है। उच्चतम वृद्धि दर्ज करने वाली गतिविधियों में निर्यात कार्गो (10%), राजमार्ग निर्माण / चौड़ाई बढ़ाना (9.8%), बिजली उत्पादन (6.6%), आयात कार्गो (5.8%) और प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो (5.3%) शामिल हैं।

जीएसटी व्यवस्था के तहत, सभी निर्माणाधीन संपत्तियों पर 8% शुल्क (स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क को छोड़कर) लिया जाता है। पूरी हो चुकी और रेडी-टू-मूव परियोजनाओं पर जीएसटी लागू नहीं है, क्योंकि ऐसी संपत्तियों की बिक्री में कोई अप्रत्यक्ष कर नहीं लगता है। जीएसटी के कारण, कीमतों में लगभग 3-4% गिरावट आने का अनुमान है।

भूसंपदा (विनियम और विकास) अधिनियम (रेरा) के तहत, 76,000 से अधिक कंपनियों वाला रियल एस्टेट क्षेत्र मई 2017 से इसके विनियमन के दायरे में आ गया है। अधिनियम के तहत, प्रत्येक राज्य और संघ शासित प्रदेश का अपना एक नियामक होगा और कामकाज के लिए नियम होंगे। मई 2017 से लागू होने वाला यह अधिनियम सबसे महत्वपूर्ण सुधार माना जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2020 तक निर्माण उपकरण उद्योग 5 अरब यूएस डॉलर का होगा। वर्ष 2025 तक निर्माण उत्पादन सालाना 7.1% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही उम्मीद है कि वर्ष 2025 तक भारत का निर्माण बाजार दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उभरता हुआ बाजार होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र में नियामकीय सुधार, तेजी से बढ़ते शहरीकरण से बढ़ती मांग, घरेलू आय और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या इसके प्रमुख कारण हैं।

100 स्मार्ट सिटी मिशन के तहत, इन स्मार्ट शहरों का चयन 'सिटी चैलेंज कॉम्पिटिशन' के जरिए किया गया था। इनके चयन में वित्तपोषण और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन, सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन, गरीबों के लिए वहन करने योग्य आवास, बिजली आपूर्ति, बेहतर आईटी कनेक्टिविटी, गवर्नेंस, विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी, नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा तथा सस्टेनेबल शहरी पर्यावरण जैसे बहुआयामी उद्देश्यों को हासिल करने की क्षमता को ध्यान में रखा गया। अभी तक 31.38 अरब यूएस डॉलर के परिव्यय के साथ 99 शहरों को चिह्नित किया गया है। देश की 99 मिलियन शहरी आबादी पर इस योजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार सांख्यिकी डाटा के अनुसार, वर्ष 2016-17 में भारत से निर्माण क्षेत्र का निर्यात लगभग 1.2 अरब यूएस डॉलर का रहा था।

टाउनशिप, शहरों के लिए ऑटोमैटिक रूट से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है। विकास परियोजनाओं (जिनमें टाउनशिप का विकास, आवासीय / वाणिज्यिक परिसरों, सड़क या पुलों, होटलों, रिसॉर्ट, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, मनोरंजन सुविधाओं का निर्माण, शहर और क्षेत्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे, टाउनशिप शामिल हैं) के लिए ऑटोमैटिक रूट से 100% एफडीआई की अनुमति है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के भीतर रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए एफडीआई सीमा 100% तक बढ़ा दी गई है। ऑटोमैटिक रूट से एकल ब्रांड खुदरा व्यापार और निर्माण विकास खंड (जिसमें टाउनशिप, आवास, बिल्ट-अप इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है) के लिए 100% एफडीआई की अनुमति है।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2017 के दौरान निर्माण (विकास) में 24.7 अरब यूएस डॉलर का एफडीआई इनफ्लो और इसी समयावधि के दौरान में निर्माण (इंफ्रास्ट्रक्चर) में 12.4 अरब यूएस डॉलर के एफडीआई इनफ्लो रहा।

2020 तक भारत का रियल एस्टेट बाजार के 180 अरब यूएस डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। 2030 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस क्षेत्र का योगदान 15% तक होने और वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा निर्माण बाजार बनने की संभावना है। उम्मीद है कि 2022 तक निर्माण उद्योग 75 मिलियन से अधिक रोजगारों के साथ सबसे बड़ा नियोक्ता होगा। भारत के शहरी जीडीपी के 2030 तक 7.5 ट्रिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद का 75% का लाभ उठाते हुए देश को 2030 तक 170 मिलियन से अधिक घरों का निर्माण करने की जरूरत है। शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का मौजूदा स्तर मौजूदा शहरी आबादी की मांगों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। बढ़ती आबादी और ग्रामीण इलाकों से शहरी इलाकों में होते पलायन को देखते हुए इस पूरी आबादी की मांगों को पूरा करने के लिए मौजूदा शहरी क्षेत्रों के पुनरुद्धार और नए तथा समावेशी स्मार्ट शहरों के निर्माण की आवश्यकता है। भविष्य के भारतीय शहरों के लिए स्मार्ट रियल एस्टेट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी।.

इस क्षेत्र में आवासीय, खुदरा, वाणिज्यिक एवं आतिथ्य क्षेत्रों में निर्माण, स्मार्ट सस्टेनेबल शहरों और एकीकृत टाउनशिप के लिए टेक्नोलॉजी और सॉल्यूशन, सस्ते और किफायती आवास, ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशन, सस्टेनेबल और पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री, निर्माण क्षेत्र के कामगारों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम, शहरी जल आपूर्ति तथा शहरी सीवरेज और सीवेज ट्रीटमेंट के संवर्धन के लिए टेक्नॉलॉजी में निवेश के अवसर विद्यमान हैं।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

इस क्षेत्र के लिए केंद्रीय बजट 2018-19 में प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं-

  • एसईजेड / ईएमसी और अन्य सेक्टोरल क्लस्टर विकसित करने के लिए कुछ प्रोत्साहन हैं - अनुमोदन बोर्ड (बीओए) द्वारा अनुमोदित अधिकृत परिचालनों के लिए एसईजेड के विकास के लिए सीमा शुल्क / उत्पाद शुल्क से छूट, एसईजेड के विकास के कारोबार से प्राप्त आय पर आयकर में 10 साल की छूट, आयकर अधिनियम की धारा 80-आईएबी के अंतर्गत 15 साल की छूट, केंद्रीय बिक्री कर में छूट और सेवा कर (धारा 7, 26 और एसईजेड अधिनियम की दूसरी अनुसूची) में भी छूट।
  • केंद्रीय बजट 2018-19 के अंतर्गत आवास और शहरी विकास निगम को 2 अरब यूएस डॉलर का आंतरिक और अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत वर्तमान बजट के अंतर्गत 1 अरब यूएस डॉलर का बजट आवंटित किया गया है। इसके अलावा, 3.84 अरब यूएस डॉलर का आंतरिक और अतिरिक्त बजट भी दिया गया है।
  • 2022 तक सभी को आवास प्रदान करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण इलाकों में 2019 तक एक करोड़ से ज्यादा घर बनाए जाएंगे।
  • प्राथमिक क्षेत्र में ऋण की कमी को पूरा करने और सरकार द्वारा वित्तपोषित बॉन्डों के जरिए राष्ट्रीय आवास बैंक के अंतर्गत किफायती आवास के लिए अलग से एक निधि की स्थापना करना।