रासायनिक उद्योग


 

संक्षिप्त विवरण

रासायनिक उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका लगभग 2.1 प्रतिशत हिस्सा है। यह सभी औद्योगिक क्षेत्रों में से सबसे ज्यादा विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसके अंतर्गत 70,000 से अधिक वाणिज्यिक उत्पाद आते हैं। यह उद्योग देश के औद्योगिक और कृषि विकास का मुख्य आधार है, जो अपने साथ-साथ रसायनों तथा अन्य संबंधित उत्पादों, पेट्रोरसायन, उर्वरक, पेंट, वार्निश, गैसों, साबुन, इत्र, टॉयलेटरी और और फार्मास्यूटिकल्स जैसे कई उद्योगों को बनाता चलता है।

भारत में प्रमुख रसायनों का उत्पादन 2.01% की सीएजीआर से बढ़ते हुए 2007-08 के 8380 हजार टन की तुलना में 2015-16 के दौरान लगभग 9884 हजार टन हो गया। 2016-17 (जनवरी 2017 तक) के दौरान प्रमुख रसायनों का उत्पादन 8478 हजार टन आंका गया।

भारत से रसायन निर्यात
  अकार्बनिक रसायन (एचएसः28) जैविक रसायन (एचएसः29) चर्म शोधन और डाई एक्सट्रैक्ट (एचएसः32) कृमिनाशक और फफूंदनाशी (एचएसः3808) कुल रसायन निर्यात
2011-12 1793.9 11693.5 1947.9 1427.9 16863.2
2012-13 1318.7 12105.6 2089.8 1740.1 17254.1
2013-14 1364.2 12017.6 2547.6 1922.3 17851.6
2014-15 1429.9 11948.9 2818.6 1949.9 18147.3
2015-16 1207.3 11509.3 2471.3 1963.0 17151.0
2016-17 1363.5 11688.6 2564.0 2136.7 17752.8
Source: DGCIS

भारत से अकार्बनिक रसायनों का निर्यात
देश निर्यात मूल्‍य (मिलियन यूएस डॉलर) हिस्‍सा (%)
यूएई 208.0 15.3
चीन 122.1 9.0
ईरान 85.1 6.2
यूएसए 70.4 5.2
मिस्र 69.0 5.1
मलेशिया 64.4 4.7
तुर्की 41.7 3.1
बांग्‍लादेश 39.7 2.9
कोरिया 37.9 2.8
जापान 36.6 2.7
कुल 1363.5 100.0
स्रोत: डीजीसीआईएस

भारत से जैविक रसायनों का निर्यात
देश निर्यात मूल्‍य (मिलियन यूएस डॉलर) हिस्‍सा (%)
यूएसए 1393.7 11.9
चीन 882.2 7.5
जर्मनी 535.0 4.6
सऊदी अरब 419.2 3.6
जापान 413.6 3.5
इंडोनेशिया 374.7 3.2
नीदरलैंड 350.1 3.0
कोरिया 348.3 3.0
स्‍पेन 336.9 2.9
ब्राज़ील 332.5 2.8
कुल 11688.6 100.0

भारत से चर्म शोधन और डाई एक्ष्त्रेक्त का निर्यात
देश निर्यात मूल्‍य (मिलियन यूएस डॉलर) हिस्‍सा (%)
यूएसए 203.7 7.9
बांग्लादेश 181.6 7.1
जर्मनी 167.0 6.5
तुर्की 150.3 5.9
चीन 120.8 4.7
ब्राज़ील 106.4 4.1
इटली 99.9 3.9
इंडोनेशिया 96.8 3.8
थाइलैंड 95.7 3.7
पाकिस्तान 87.2 3.4
नीदरलैंड 73.5 2.9
कुल 2564.0 100.0

भारत से कृमिनाशकों और कीटनाशकों का निर्यात
देश निर्यात मूल्‍य (मिलियन यूएस डॉलर) हिस्‍सा (%)
यूएसए 365.9 17.1
ब्राज़ील 363.3 17.0
जापान 104.9 4.9
फ्रांस 78.2 3.7
बेल्जियम 62.3 2.9
चीन 58.1 2.7
वियतनाम 56.7 2.7
ऑस्‍ट्रेलिया 55.9 2.6
बांग्लादेश 55.8 2.6
इंडोनेशिया 50.9 2.4
कुल 2136.7 100

रसायन क्षेत्र में सभी लागू नियमों और कानूनों के अनुसार ऑटोमेटिक रूट के तहत शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है। अप्रैल 2000 से जून 2017 की अवधि के दौरान रसायन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग 14 अरब यूएस डॉलर रहा, जो देश में कुल एफडीआई अंतर्वाह का 4% था।

भारतीय रसायन उद्योग एक विवध उत्पाद उद्योग है और देश के औद्योगिक तथा कृषि संबंधी विकास में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह अपने से नीचे के विभिन्न उद्योगों के लिए मूलभूत ढांचा भी उपलब्ध कराता है। सरकार द्वारा की गई कुछ पहलें, जैसे- सीबीईसी की सिंगल विंडो इंटरफेस फॉर फैसिलिटेटिंग ट्रेड (स्विफ्ट), मेक इन इंडिया और रसायन उद्योग लगाने के लिए पर्यावरण संबंधी नियमों में दी गई छूट से रसायन उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, इस उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे, संचालन स्तर, बिजली की सुनिश्चितता और व्यापार सुगमता जैसी कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के चलते उद्योग के विकास पर विपरीत असर पड़ा है और इस उद्योग में व्याप्त संभावनाओं को आकार देने के लिए सरकार द्वारा कुछ कदम उठाए जाने की जरूरत है। वैकल्पिक कच्चे माल की उपलब्धता, अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में निवेश बढ़ाकर और सहयोग इसके कुछ उपाय हो सकते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, कृषि रसायनों तथा विशिष्ट रसायन खंडों द्वारा बढ़ती मांग के चलते इस क्षेत्र में आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। पेट्रो-रसायन खंड में भी अच्छी बढ़त इस उद्योग के विकास में सहायक होगी।


 

कुछ सरकारी प्रोत्साहन

  • सरकार ने यूलेक्साइट अयस्क (कैल्शियम सोडियम बोराटे) (2528) पर बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) 2.5% से घटाकर 0% कर दिया है।
  • सरकार ने नाफ्था (27101290) पर विशेष अतिरिक्त शुल्क (एसएडी) 4% से घटाकर 2% कर दिया है।
  • सरकार ने स्टेरिन मॉनमर (29025000) पर बीसीडी 2.5% से घटाकर 2% कर दिया है। इसके अतिरिक्त इस उत्पाद पर एसएडी भी 4% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
  • सरकार ने एथिलिम डाइक्लोराइड (29031500) पर बीसीडी 2.5% से घटाकर 2% कर दिया है। इसके अतिरिक्त इस उत्पाद पर एसएडी भी 4% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
  • सरकार ने विनिल क्लोराइड मॉनमर (29032100) पर बीसीडी 2.5% से घटाकर 2% कर दिया है। इसके अलावा, इस उत्पाद पर एसएडी 4% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
  • सरकार ने आइसोप्रीन (29012400) पर बीसीडी 5% से घटाकर 2.5% कर दिया है।
  • सरकार ने हाइड्रोजन पैरोक्साइड के लिए एनथ्रकिनोन पर बीसीडी 7.5% से घटाकर 2.5% से कर दिया है।
  • सरकार ने ब्यूटाइल एक्रीलेट पर बीसीडी 7.5% से घटाकर 5% कर दिया है।
  • सरकार ने तरलीकृत ब्यूटेन्स पर बीसीडी 5% से घटाकर 2.5% कर दिया है।

उद्योग/निजी प्रायोजित शोध कार्यक्रम- आयकर अधिनियम की धारा 35 (2एए) के अंतर्गत कुछ भारित कर छूट दी जाती है। किसी भी राष्ट्रीय लैबोरेट्री, विश्वविद्यालय या प्रौद्योगिकी संस्थान को किसी विशेष व्यक्ति को विशेष दिशा के साथ किए गए भुगतान के लिए 200% की भारित छूट प्रदान की जाती है। बशर्ते कि वह रकम विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित कार्यक्रम में वैज्ञानिक शोध के लिए इस्तेमाल की गई हो।

वैज्ञानिक शोध और विकास पर किए गए पूंजीगत और राजस्व दोनों तरह के खर्च पर आयकर अधिनियम की धारा 32 (2एबी) के अंतर्गत 200% की भारित छूट दी जाती है। जमीन और इमारत पर खर्च इस छूट में शामिल नहीं किया जाता।

  • उपर्युक्त के अलावा, भारत का प्रत्येक राज्य औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करता है।
  • ये प्रोत्साहन रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराने तथा जमीन बेचने / लीज पर देने में स्टाम्प ड्यूटी में छूट, रियायती दरों पर बिजली, रियायती ब्याज दरों पर ऋण की उपलब्धता, निवेश सब्सिडी / करों में छूट / पिछड़े क्षेत्रों को सब्सिडी तथा बड़ी परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज के रूप में दिए जाते हैं।
  • निर्यात संवर्धन पूँजीगत माल योजना
  • शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉबैक) योजना
  • भारत से वस्तु निर्यात योजना
  • भारत से सेवा निर्यात योजना

संबंधित अधिनियमों में उल्लिखित अनुसार विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) / राष्ट्रीय निवेश और विनिर्माण क्षेत्रों (एनआईएमजेड) तथा पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे विशेष क्षेत्रों में परियोजनाएं लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है।


 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियमन

रीच (ईसी 1907/2006): इसका उद्देश्य रासायनिक तत्वों की पहले ही पहचान करके मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में सुधार लाना है। यह चार रीच की प्रक्रियाओं से होता है। ये चार प्रक्रियाएं हैं- रजिस्ट्रेशन, मूल्यांकन, प्राधिकार और रसायनों पर प्रतिबंध लगाया जाना। रीच का उद्देश्य यूरोपीय संघ के रयासन उद्योग की प्रतिस्पर्द्धात्मकता और उसमें नवाचार बढ़ाना भी है।

"कोई डाटा नहीं, कोई बाजार नहीं": रीच विनियमन रसायनों से होने वाले जोखिमों का प्रबंधन करने और उन पर सुरक्षा जानकारी प्रदान करने के लिए उद्योग की जिम्मेदारी तय करता है। निर्माताओं और आयातकों को अपने रासायनिक पदार्थों पर जानकारी जुटाना जरूरी है, जो उनकी सुरक्षित हैंडलिंग सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही उन्हें इस जानकारी को हेलसिंकी स्थित यूरोपीय रसायन एजेंसी में रजिस्टर कराना भी आवश्यक होता है। रीच सिस्टम में यह एजेंसी एक केंद्रीय संस्था है। यह सिस्टम के संचालन के लिए जरूर डाटाबेस का प्रबंधन करती है, संदिग्ध रसायनों के मूल्यांकन का समन्वय करती है और एक सार्वजनिक डाटाबेस तैयार करती है, जहां उपभोक्ता और प्रोफेशनल जोखिम से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

यह विनियमन उपयुक्त विकल्पों की पहचान के साथ सबसे खतरनाक रसायनों ( जिन्हें "बहुत अधिक चिंता का विषय" माना गया है) को बदलने की भी मांग करता है।

विभिन्न देशों में विनियमनों पर अधिक जानकारी के लिए कृपया यह लिंक देखें:: http://www.standardsmap.org/identify

टॉक्सिक सब्सटैंस कंट्रोल एक्ट (टीएससीए) संयुक्त राज्य से बाहर से आयात किए जाने वाले या निर्यात किए जाने वाले रसायनों का नियमन करता है। इस अधिनियम की धारा-13 के अंतर्गत यूएसए को निर्यात करने वालों को इसके विनियमों का अनुपालन करना आवश्यक है। इसके साथ ही आयातकों को भी आयात करने से पहले रासायनिक पदार्थों, मिश्रण या रासायनिक पदार्थ वाली वस्तु को प्रमाणित करना जरूरी होता है कि ये इस अधिनियम के विनियमों के अनुरूप हैं।


विभिन्न देशों में विनियमनों पर अधिक जानकारी के लिए कृपया यह लिंक देखें:: http://www.standardsmap.org/identify

 

उपयोगी कड़ियां

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