विमानन


 

अवलोकन

अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) 2018 के आंकड़ों के अनुसार भारत में विमानन क्षेत्र ने चौथे वर्ष (18.6%) में सबसे तेज घरेलू बाजार वृद्धि दर्ज की, उसके बाद चीन का स्‍थान रहा । विश्व में भारत का नौवां सबसे बड़ा नागरिक विमानन बाजार है। यह क्षेत्र वर्तमान में देश में 8 मिलियन नौकरियां मुहैया कराता है। भारत में हवाई परिवहन बाजार 390,000 से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है और आपूर्ति श्रृंखला में 570,000 लोगों की सहायता करता है। समग्र रूप से यह उद्योग भारत की जीडीपी में सालाना औसतन 30 बिलियन यू एस डॉलर का योगदान देता है। बढ़ते हुए व्यापार एयरपोर्ट के लिए अच्‍छा साबित हो रहे हैं क्योंकि वे भारत के कुल व्यापार का लगभग 30% संभालते हैं (मूल्य की दृष्टि से)।

क्षमता और ट्रैफिक

वित्त वर्ष 2019 के पहले नौ महीनों के दौरान, भारत में माल ढुलाई की वृद्धि दर सालाना 7% रही, तथा घरेलू माल ढुलाई में 12% की वृद्धि हुई, जबकि अंतर्राष्ट्रीय माल वृद्धि 4% रही।

यात्री ट्रैफिक इकाई 2016-17 2017-18 % परिवर्तन
घरेलू यात्री प्रस्थान करने वाले यात्री 103.75 मिलियन 123.32 मिलियन 18.86
घरेलू एयरलाइन की मांग आरपीके (राजस्व यात्री किलोमीटर) 98.64 बिलियन 117.04 बिलियन 18.65
घरेलू एयरलाइन की क्षमता एएसके (उपलब्ध सेट किलोमीटर) 116.94 बिलियन 134.54 बिलियन 15.05
अंतर्राष्ट्रीय यात्री प्रस्थान और आगमन करने वाले यात्री 54.68 बिलियन 60.58 बिलियन 10.79
कुल (घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय) 158.43 बिलियन 183.90 बिलियन 16.08
स्रोत: नागरिक विमानन सांख्यिकी हैंडबुक 2017-18
नोट: एएसके की गणना प्रत्येक फ्लाइट स्‍टेज में उपलब्ध सीटों की कुल संख्या को गुणा करके संबंधित स्‍टेज दूरी के अनुसार प्राप्त उत्पादों के योग के रूप में की जाती है और आरपीके की गणना राजस्व यात्रियों की संख्या को गुणा करके प्राप्त उत्पाद के योग के रूप में की जाती है, जो प्रत्येक फ्लाइट स्टेज पर संबंधित स्टेज की दूरी के आधार पर किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों के यातायात में क्रमशः (अप्रैल- जनवरी) 2017-18 की तुलना में (अप्रैल- जनवरी) 2018-19 की अवधि के दौरान क्रमशः 6.8% और 15.7% की वृद्धि हुई जिसके परिणामस्वरूप कुल यात्री यातायात में 13.8% की वृद्धि दर्ज की गई।

भारत में माल ढुलाई का ट्रैफ़िक वित्तीय वर्ष 06 में 1.40 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर इस अवधि के दौरान वित्तीय वर्ष 18 में 3.36 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, इस अवधि के दौरान 7.56% का सीएजीआर दर्ज किया गया। अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 के दौरान कुल माल यातायात 2.9 मिलियन टन था। जनवरी 2018 से जनवरी 2019 के दौरान भारत के सभी एयरपोर्टों पर विमानों की आवाजाही, यात्री और माल ढुलाई में क्रमशः 9.8 प्रतिशत, 8.4 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

श्रेणी अप्रैल- जनवरी % परिवर्तन
विमान परिचालन ('000 में) 2018-19 2017-18  
अंतरराष्ट्रीय 379.28 365.25 3.8
घरेलू 1812.72 1554.42 16.6
कुल 2192.00 1919.67 14.2
साधारण विमानन 220.79 232.22 -4.9
यात्री (मिलियन में)      
अंतरराष्ट्रीय 57.99 54.32 6.8
घरेलू 231.00 199.58 15.7
कुल 288.99 253.90 13.8
भाड़ा ('000 टन में)      
अंतरराष्ट्रीय 1838.31 1780.93 3.2
घरेलू 1142.68 1011.27 13.0
कुल 2980.99 2792.20 6.8
स्रोत: डीजीसीए

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

स्वचालित मार्ग के तहत गैर-अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं, हेलिकॉप्टर सेवाओं और समुद्री विमानों में 100% एफडीआई की अनुमति दी गई है। स्वचालित मार्ग के तहत एमआरओ में; रखरखाव और मरम्मत संगठनों; विमानन प्रशिक्षण संस्थानों तथा तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों के लिए 100% एफडीआई की अनुमति दी गई है। स्वचालित मार्ग के तहत क्षेत्रीय विनियमों और सुरक्षा मंजूरी के अध्यधीन ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं को भी 100% एफडीआई के लिए अनुमति दी गई है।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2018 के दौरान हवाई माल ढुलाई सहित हवाई परिवहन में एफडीआई 1820.6 मिलियन यूएस डॉलर $ था।

संभावनाएं

वित्तीय वर्ष 2018 के दौरान जीएसटी लागू होने और विमान पुर्जों के परिवहन में अप्रत्याशित गिरावट आने के चलते वित्तीय वर्ष 2019 में अंतरराष्ट्रीय माल यातायात वृद्धि दर में 3-5% की गिरावट दर्ज की गई। मौजूदा वित्तीय वर्ष में तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की गिरावट ने एयरलाइन कंपनियों के परिचालन मुनाफे को कम कर दिया है।

बोइंग 737 मैक्स के शामिल होने से ईंधन दक्षता में काफी सुधार होने की उम्मीद थी। ईंधन की लागत में बचत से उद्योग में आने वाले घाटे को कम करने की उम्मीद थी। 29 अक्टूबर, 2018 को इथियोपियन एयरलाइन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, नागरिक विमानन मंत्रालय ने बोइंग 737 मैक्स 8 फ्लाइट के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि इससे निपटने के लिए "विमान सुरक्षा" एक नई समस्या बन गई है। मार्केट शेयर के लिहाज से भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन (जेट एयरवेज) और चौथी सबसे बड़ी एयरलाइन (स्पाइस जेट) की उड़ानों की संख्या घटने के चलते किराये में वृद्धि की संभावना है।

हालांकि, क्रिसिल रिसर्च के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-23 में, कुल यात्री यातायात 13-15% सीएजीआर से बढ़कर 603 मिलियन होने की उम्मीद है, जबकि घरेलू यातायात हिस्सेदारी बढ़कर 81-82% तक पहुंचने की उम्मीद है। घरेलू यात्री यातायात में तेज वृद्धि के कारण शेयर में 3-15% वृद्धि की उम्मीद है, तो वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात शेयर में 8-10% तक की वृद्धि की संभावना है।

उड़ान फेज-I के दौरान एयर ओडिशा और डेक्कन चार्जर्स को दिए गए रूटों को रद्द करने के कारण, नवंबर 2018 में परिचालन उड़ान हवाई अड्डों की संख्या 31 पर बनी रही, क्योंकि परिचालन मार्गों की संख्या अगस्त 2018 में 90 से गिरकर 75 हो गई। तथापि, कनेक्टिविटी वाले हवाईअड्डों की संख्या में सुधार होने की आशा है, क्योंकि उड़ान फेज-II से और अधिक मार्ग संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने हाल ही में पर्यटन मंत्रालय की साझेदारी से उड़ान फेज-III के अंतर्गत 235 मार्गों को ठेके पर देने की घोषणा की है। इससे, उड़ान एयरपोर्ट्स पर विकास को मदद मिलने की उम्मीद है।

गैर-मेट्रो परियोजनाओं के निजीकरण के साथ-साथ दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नै एयरपोर्ट में निवेश के परिणामस्वरूप, भारतीय एयरपोर्ट में निवेश में आगामी राजकोषीय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के अलावा, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और कन्नूर भी सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित किए जा रहे हैं। यहां तक कि प्रमुख आगामी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों जैसे नवी मुंबई, मोपा (गोवा), भोगापुरम (आंध्र प्रदेश), धोलेरा (गुजरात) के अलावा अन्य पीपीपी मार्ग के तहत भी योजना बनाई जा रही है। पीपीपी हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि से निवेश के बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि यह क्रिसिल रिसर्च के अनुसार एएआई पर निर्भरता को कम करके क्षेत्र में वित्तीय फ्लेक्सिब्लिटी में सुधार करता है।


 

सरकारी प्रोत्साहनों का चयन

सरकारी प्रोत्साहनों का चयन

  • नवंबर 2018 में, परिचालन उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) हवाईअड्डों की संख्या 31 पर बनी रही, जबकि परिचालन मार्गों की संख्या अगस्त 2018 में 90 से गिरकर 75 हो गई। कटौती मुख्य रूप से उड़ान फेज I के दौरान एयर ओडिशा और डेक्कन चार्जर्स को दिए गए मार्गों के रद्द होने के कारण हुई थी।
  • भारत सरकार ने हाल ही में जारी राष्ट्रीय एयर कार्गो पॉलिसी की रूपरेखा 2019 में, भारतीय एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स को अगले दशक के अंत तक वैश्विक स्तर पर सबसे कुशल, सहज और लागत और समय प्रभावी बनाने की परिकल्पना की है।
  • वर्तमान में, छह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पीपीपी मोड के तहत सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।
  • इस क्षेत्र में 2027 तक 25 बिलियन यूएस डॉलर के निवेश की उम्मीद है।
  • नवंबर 2018 में, भारत सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत छह एएआई हवाई अड्डों के प्रबंधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। ये हवाई अड्डे अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मैंगलोर में स्थित हैं।
  • नवी मुंबई हवाई अड्डे को जीवीके समूह की सहायक कंपनी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एमआईएएल) और सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ महाराष्ट्र लिमिटेड (सिडको) द्वारा 16,000 करोड़ रुपये ( 2.22 बिलियन यूएस डॉलर) के निवेश के साथ पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।
  • अक्तूबर 2018 में, भारत सरकार ने हवाईअड्डों पर यात्रियों के 'डिजि यात्रा' नामक बायोमीट्रिक डिजिटल प्रोसेसिंग पर एक नीति जारी की है, यह नीति एक कनेक्टेड इकोसिस्टम के माध्यम से भारतीय एयरपोर्ट में एक समान कार्यान्वयन और यात्री अनुभव को सुनिश्चित करेगी।
  • डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म को दूरस्थ रूप से नियंत्रित करने वाले एरियल सिस्टम्स (आरपीएएस) के उड़ान को वैध करने के लिए दिसंबर 2018 में लॉन्च किया गया था, जिसे लोकप्रिय रूप से इसे ड्रोन के नाम से जाना जाता है। अगर किसी आरपीएएस को उड़ान भरने की अनुमति नहीं है, तो उसे अगस्त 2018 में मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए नागरिक उड्डयन विनियमों के तहत नो परमिशन-नो-टेकऑफ (एनपीएनटी) की पॉलिसी के तहत उड़ान भरने करने की अनुमति नहीं होगी।