ऑटोमोबाइल सेक्टर


 

अवलोकन

उत्पादन

ऑटोमोबाइल उत्पादन में 2006-16 की अवधि के दौरान 9.4 प्रतिशत के सीएजीआर से वृद्धि हुई है। यात्री वाहन खंड 10.09 प्रतिशत की सीएजीआर से इस अवधि के दौरान सबसे तेजी से बढ़ता खंड रहा, जिसके बाद दुपहिया क्षेत्र है, जो 2006-16 के दौरान 9.48 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ा।

ऑटोमोबाइल उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.1 प्रतिशत का हिस्सा रखता है। उद्योग ने अप्रैल-मार्च 2017 में 5.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और इस अवधि के दौरान यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, तीन पहिया, दुपहिया वाहन और क्वाड्रीसायकल वाहनों सहित कुल 25,316,044 वाहनों का उत्पादन किया गया।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के कुल उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है और इनका उत्पादन 2014-15 के 17,107 से बढ़कर 2015-16 में 71,909 हो गया।

यात्री वाहन खंड में 2013-14 को छोड़कर 2010-11 से लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। 2016-17 के दौरान, इस खंड में 37,91,540 वाहनों के उत्पादन के साथ 9.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

समग्र वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र, जिसमें 2011-12 में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई थी, 2012-13, 2013-14 और 2014-15 के दौरान कमजोर पड़ गया। तथापि, इस खंड में 2015-16 और 2016-17 के दौरान कुछ गति आई।

थ्री-व्हीलर सेगमेंट में 2010-11 के बाद से मिली-जुली प्रवृत्ति दर्ज की गई; 2012-13 और 2013-14 में जहां इस सेगमेंट में मामूली गिरावट दिखी। वहीं 2014-15 के दौरान इस खंड में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 2015-16 और 2016-17 में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई।

दुपहिया वाहन सेगमेंट में 2010-16 की अवधि के दौरान उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। इस खंड ने 2016-17 के दौरान वृद्धि गति को बनाए रखा और 1,99,29,485 वाहनों के उत्पादन के साथ 5.83 प्रतिशत की वृद्धि रिकॉर्ड की।

निर्यात

अप्रैल-मार्च 2017 के दौरान, ऑटोमोबाइल निर्यात में (-) 4.53 प्रतिशत की गिरावट आई। यह गिरावट तिपहिया और दुपहिया वाहनों का निर्यात घटने के चलते रही जिन्होंने अप्रैल-मार्च 2017 में क्रमश: (-) 32.77 प्रतिशत तथा (-) 5.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। यह गिरावट यात्री वाहनों और कॉमर्शियल वाहनों के निर्यात द्वारा समंजित हो गई जिन्होंने अप्रैल-मार्च 2017 में क्रमश: 16.20 प्रतिशत और 4.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज दर्ज की।

2015-16 में ऑटोमोबाइल निर्यात में 1.91 प्रतिशत (8.8 अरब यूएस डॉलर मूल्य का निर्यात) की वृद्धि हुई। यह वृद्धि मुख्यतः यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहनों और दुपहिया वाहनों द्वारा निर्देशित रही जिनमें इस अवधि के दौरान क्रमश: 5.24 प्रतिशत, 16.97 प्रतिशत और 0.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि, तिपहिया वाहन खंड में 2015-16 के दौरान वृद्धि में (-) 0.78 प्रतिशत की गिरावट आई ।

कुल निर्यात में 2015-16 में 69.4 प्रतिशत हिस्से के साथ दुपहिया वाहन खंड का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जिसके बाद 16.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ यात्री वाहनों का हिस्सा रहा। तिपहिया वाहन खंड का 2015-16 के दौरान निर्यात में 11.1 प्रतिशत हिस्सा रहा।

ऑटो क्षेत्र के निर्यात में ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र का निर्यात पिछले 6 वर्षों के दौरान 10.02 प्रतिशत के सीएजीआर में बढ़ा है, जो 2010-11 के 6.7 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर 2015-16 में 10.8 अरब यूएस डॉलर हो गया है।

2015-16 के दौरान ऑटो कंपोनेंट उद्योग ने देश के कुल निर्यात में 4 प्रतिशत का योगदान दिया और 10.81 अरब यूएस डॉलर का निर्यात किया। संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, तुर्की, ब्रिटेन और इटली भारत के शीर्ष निर्यात स्थलों के रूप में उभरे।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

भारत को एक आकर्षक विदेशी निवेश गंतव्य बनाने और व्यापार सुगमता बढ़ाने की ओर निर्देशित नीतिगत सुधारों के चलते ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने अच्छा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया।

ऑटोमोबाइल उद्योग को मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत रोजगार सृजन, सकल घरेलू उत्पाद में योगदान और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने की दृष्टि से एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है ।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2016 की अवधि के दौरान, ऑटो उद्योग ने 16.51 अरब यूएस डॉलर मूल्य का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया है।

परिदृश्य

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7 प्रतिशत से अधिक के योगदान साथ एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

बढ़ती प्रयोज्य आय, बढ़ते शहरीकरण, विस्तारित होते ग्रामीण बाजार और स्मार्ट सिटी, देश को अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) का केंद्र बनाने की दृष्टि से राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण और और आर एंड डी केंद्र (एनएटीआरआईपी) बनाने जैसी सरकार की पहलों का विस्तार और ऑटोमोटिव मिशन योजना 2016-26 की घोषणा आदि कुछ ऐसे प्रमुख कारक हैं जो देश में वाहन उद्योग को और आगे बढ़ाएंगे।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • ऑटोमैटिक रूट के तहत ऑटो सेक्टर में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी गई है।
  • इस क्षेत्र में विनिर्माण और आयात के लिए लाइसेंसिंग और मंजूरियों से छूट दी गई है।
  • भारत को अधिक निवेशक अनुकूल और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एक आकर्षक स्थल बनाने के एक प्रयास में, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति 2016-2020 में ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है।
  • इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए, अनुसंधान एवं विकास व्यय पर छूट दी गई है।
  • ऑटो उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने न्यूनतम निवेश मानदंडों के बिना ऑटोमैटिक रूट से 100% तक विदेशी इक्विटी निवेश की अनुमति दी है।
  • ऑटोमोटिव मिशन योजना 2016-26 (एएमपी 2016) भारत सरकार और भारतीय मोटर वाहन उद्योग का एक सामूहिक विजन है। इसके अंतर्गत वाहन, ऑटो पुर्जे और ट्रैक्टर उद्योगों को अगले दस वर्षों में बढ़ाने पर बल दिया गया है, ताकि ये उद्योग भारत के विकास में बड़ा योगदान देने और अपनी वैश्विक छाप छोड़ने का साथ-साथ तकनीकी परिपक्वता, प्रतिस्पर्धा और संस्थागत संरचना तथा क्षमताएं बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें।
  • एएमपी 2026 के अंतर्गत ऐसी उम्मीद जताई गई है कि आने वाले समय में भारत 300 बिलियन यूएस डॉलर के सकल राजस्व के साथ दुनिया के शीर्ष तीन ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्रों में से एक होगा।
  • भारत को अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण और आर एंड डी बुनियादी ढांचा परियोजना (एनएटीआरआईपी) बनाई है। यह परियोजना 585 मिलियन यूएस डॉलर की लागत के साथ इस उद्योग को वैश्विक प्रदर्शन मानकों को लागू करने में सक्षम बनाएगी।
  • किफायती और अच्छे हाइब्रिड तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार तथा उद्योग सहयोग के जरिए नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना 2020 (एनईएमएमपी) शुरू की गई है। इसका उद्देश्य स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित करना है।
  • हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और इनके विनिर्माण के लिए शुरुआती दो वर्षों के लिए एक पायलट योजना शुरू की गई है, जिसे 1 अप्रैल 2015 से शुरुआती दो वर्षों के लिए लागू किया गया है।

 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियम

यूरोप

पर्यावरण की रक्षा करने और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए यूरोपीय संघ फ्रेमवर्क के हिस्से के रूप में कारों, वैन, ट्रकों, बसों और कोच के लिए उत्सर्जन विनियमों को अपनाया गया है। वर्तमान में, मोटर वाहन उद्योग द्वारा अपनाए गए यूरो उत्सर्जन मानक हैं: हल्के वाहनों (कार और वैन) के लिए यूरो 6 तथा भारी वाहनों के लिए यूरो VI है।

 

चीन

चीन का एक आरओएचएस कार्यक्रम है, जिसे "ऑटोमोबाइल आरओएचएस" के नाम से जाना जाता है। इसमें "वाहनों से निकलने वाले खतरनाक पदार्थों और रिसाइकल योग्य पदार्थों का अनुपात निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकतम 9 सवारियों वाली यात्री कारों (एम 1 श्रेणी) के लिए खतरनाक पदार्थ सामग्री और रिसाइकल योग्य अनुपातों को निर्दिष्ट करना है। यह कार्यक्रम इन दोनों मुद्दों को नियंत्रित करने वाले दो अलग-अलग मानकों को पूरा करता है।

कुछ निश्चित यात्री कारों के लिए प्रतिबंधित सामग्री और रिसाइकल योग्य आवश्यकताओं पर केंद्रित नए उपाय 1 जनवरी, 2016 से लागू किए गए हैं।

  • सीसा, पारा, हेक्जावैलेंट क्रोमियम, पोलिब्रोमिनेटेड डायफिनाइल, मोटर वाहन या मोटर वाहन पुर्जों के किसी भी समरूप सामग्री में 0.1% से अधिक नहीं होने चाहिए।
  • कैडमियम मोटर वाहन या मोटर वाहन पुर्जों के किसी भी समरूप सामग्री में 0.1% से अधिक नहीं होने चाहिए।

दक्षिण कोरिया

ध्वनि और कंपन नियंत्रण अधिनियम (नई कारों द्वारा उत्पन्न ध्वनि के स्वीकार्य मानक) के अनुच्छेद 30 के अंतर्गत राष्ट्रपति आदेश द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि नए मोटर वाहनों द्वारा उत्पन्न ध्वनि, इसके लिए तय किए गए मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

वाहनों से निकलने वाली गैसों का विनियमन स्वच्छ हवा संरक्षण अधिनियम के अनुच्छेद 46 (उत्सर्जित गैसों के प्रकार) के अंतर्गत किया गया है।

उत्तर अमेरिका

संयुक्त राज्य अमेरिका ने वाहनों अथवा वाहन पुर्जों द्वारा उत्सर्जन और सुरक्षा जरूरतों के लिए यूएस पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) और परिवहन विभाग (डीओटी) द्वारा कानून बनाए गए हैं।