ऑटो- पुर्जे उद्योग


 

परिदृश्य

भारत में ऑटो-पुर्जे उद्योग का पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास हुआ है। इसकी मुख्य वजहें रही हैं उपभोक्ताओं का रुझान बढ़ना, क्रय शक्ति में सुधार आना, सहयोगात्मक सरकारी प्रोत्साहन और वित्तीय सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी का होना। ‘दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन’ (आसियान), जापान, कोरिया और यूरोप जैसे प्रमुख वैश्विक ऑटोमोटिव बाजारों से भारत की भौगोलिक निकटता अपने अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में इसे प्रतिस्पर्धी बढ़त देती है।

भारतीय ऑटो- पुर्जे उद्योग को मोटे तौर पर संगठित और असंगठित क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है। संगठित क्षेत्र में मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) आते हैं और इसमें उच्च-मूल्य वाले उपकरण शामिल होते हैं। जबकि असंगठित क्षेत्र में कम मूल्य वाले उत्पादों का समावेश होता है और ये विनिर्माता द्वारा उत्पाद को बाजार में उतारने के बाद वाली श्रेणी में आते हैं, जिसे आफ्टर मार्केट क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। भारत के जीडीपी में इस उद्योग का लगभग 7 प्रतिशत हिस्सा है और यह उद्योग सीधे तथा परोक्ष रूप से करीब 30 लाख लोगों को रोजगार देता है।

उद्योग ने 2012-13 से 2017-18 के दौरान सालाना 10% की सीएजीआर दर्ज की है। इसी अवधि के दौरान उद्योग का निर्यात 9.7 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर 13.5 अरब यूएस डॉलर हो गया।

ऑटो पुर्जा उद्योग में वित्तीय वर्ष 2017-18 में 18.3% की वृद्धि दर दर्ज की गई और टर्नओवर बढ़कर 51.2 अरब यूएस डॉलर हो गया। यूरोप और लैटिन अमेरिका में परिचालन की तुलना में यहां विनिर्माण लागत 10-25% तक कम पड़ती है। भारत में 3,099 सौ करोड़ रुपए के उत्पादन का आकलन है, जिसमें कुल उत्पादन का 26% हिस्सा इंजन तथा 14% हिस्सा सस्पेंशन और ब्रेकिंग पुर्जों का है।

इस उद्योग में असंगठित क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में हैं, जिनकी संख्या संगठित क्षेत्र की तुलना में 14 गुना अधिक है। हालांकि, उद्योग के कुल टर्नओवर का 85% हिस्सा संगठित क्षेत्र से है।

संगठित क्षेत्र में मुख्य रूप से ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (ओईएम) आते हैं, जिसमें उच्च मूल्य वाले इंस्ट्रूमेंट शामिल होते हैं, जबकि असंगठित क्षेत्र में कम मूल्य वाले उत्पाद होते हैं और अधिकतर आफ्टरमार्केट श्रेणी में आते हैं। वित्त वर्ष 2013 के बाद से, ऑटो पुर्जों के आफ्टरमार्केट 14% की सीएजीआर दर्ज की गई, जो 2012-13 के 317 करोड़ रुपए से बढ़कर 2017-18 में 616 सौ करोड़ रुपए का हो गया।

ऑटो पुर्जों का भारत का निर्यात वर्ष 2012-13 में 9.7 अरब यूएस डॉलर था, जो लगातार बढ़ते हुए 2017-18 में 13.5 अरब यूएस डॉलर हो गया और इसमें 11.4% की सीएजीआर दर्ज की गई। इसी अवधि के दौरान भारत के आयात में भी 7% की सीएजीआर दर्ज की गई। भारत से निर्यात किए जाने वाले अग्रणी उत्पादों में ट्रांसमिशन और स्टीयरिंग (34%), इंजन पुर्जे (20%) और बॉडी/चेसिस (16%) शामिल हैं। इस अवधि के दौरान भारत के अपने उद्योग में बड़े परिवर्तन आए हैं और व्यापार घाटा भी घटा है। ऑटोमोटिव मिशन योजना 2016-26 (एएमपी) के अनुसार, भारतीय ऑटो-पुर्जे उद्योग का राजस्व 2026 तक 200 अरब यूएस डॉलर और निर्यात 80 अरब यूएस डॉलर हो सकता है।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से जून 2018 की अवधि के दौरान भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में 19.29 अरब यूएस डॉलर की एफडीआई आवक दर्ज की गई थी, जो देश में कुल एफडीआई आवक का 4.95% है। बोस चेसिस सिस्टम्स, टेनेको और फौरेशिया आदि जैसी कंपनियों ने भारत में अपनी विनिर्माण और शोध एवं विकास इकाइयां स्थापित की हैं। ऑटो पुर्जा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है, जो भारत सरकार द्वारा लागू नियमों और कानूनों के अधीन है।

वर्ष 2020 तक भारतीय ऑटो पुर्जा उद्योग का टर्नओवर 100 अरब यूएस डॉलर का होने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही है कि चीन, अमेरिका और जापान के बाद भारत 2020 तक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटो पुर्जा उत्पादक देश होगा। 2025 तक ऑटोमोबाइल उद्योग के दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो-पुर्जा उद्योग बनने की संभावना है। इससे वृद्धि का असर निर्यात क्षेत्र पर भी पड़ेगा और निर्यात भी बढ़ेगा।

वैश्विक परिदृश्य में सुधार के चलते वित्तीय वर्ष 2018 से 2020 के दौरान ऑटो पुर्जों का निर्यात 10-12% की सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले पांच वर्षों की 8% की सीएजीआर से बेहतर दर है। इसके अतिरिक्त, भारत गुणवत्ता और सुरक्षा उपायों के मामले में उच्चतर वैश्विक मानकों की ओर बढ़ रहा है। इससे कंपनियों को नए भौगोलिक क्षेत्रों में अपना विस्तार करने और दूसरे कम लागत मूल्य वाले देशों की तुलना में बेहतर बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

संभावना जताई जा रही है कि ऑटो-पुर्जा उद्योग इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए ओईएम की तर्ज पर चलेगा। दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता से हालांकि ऑटोमोटिव आपूर्तिकर्ताओं के लिए नई चुनौतियां और नए जोखिम पैदा होंगे, लेकिन इसके साथ ही नए अवसर भी सृजित होंगे। आकलन के अनुसार, लोगों द्वारा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के चलते वर्ष 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैट्रियों का घरेलू बाजार 300 अरब यूएस डॉलर का हो सकता है।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • ऑटोमोटिव मिशन योजना (एएमपी) 2016-26 सरकार ने 2015 में घोषित की थी, जिसमें 2026 तक इस क्षेत्र में चार गुना वृद्धि के साथ 65 मिलियन नौकरियों और देश की जीडीपी में 12% के योगदान का लक्ष्य रखा गया था।
  • नेशनल ऑटोमोटिव टेस्टिंग एंड आर एंड डी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (नैट्रिप) की स्थापना 388.5 मिलियन यूएस डॉलर के फंड के साथ की गई थी। इसका उद्देश्य भारत में अत्याधुनिक परीक्षण, सत्यापन और शोध एवं विकास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है, ताकि भारत में वैश्विक मानकों को अपनाते हुए उन्हें लागू किया जा सके।
  • नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (एनईएमएमपी) के अंतर्गत फेम-इंडिया की शुरुआत 2015 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक प्रौद्योगिकी सहित सभी वाहन खंडों को प्रोत्साहित करना था। इस योजना को 1 अप्रैल, 2018 को तीसरी बार विस्तार प्रदान किया गया और इसकी वैधता बढ़ाकर 30 सितंबर, 2018 कर दी गई।
  • बजट 2018-19 में ट्रकों और बसों के लिए रेडियल टायरों के आयात पर सीमा शुल्क 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया और पूर्ण निर्मित वाहनों, यूनिटों, उत्पादों की असेंबलिंग किट (नॉक्ड डाउन यूनिट) और ऑटो पुर्जों के आयात पर सीमा शुल्क 5% से बढ़ाकर 7.5% कर दिया गया। विभिन्न इंजन और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स पर सीमा शुल्क 7.7% से बढ़ाकर 16.5% कर दिया गया और सस्पेंशन पार्ट्स, स्टीयरिंग, पहिए की रिम आदि पर सीमा शुल्क 10.3% से बढ़ाकर 16.5% कर दिया गया। 11 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए 1000 ई-वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भी घोषणा की गई।
  • मई 2018 में चीन से बनने वाले या वहां से निर्यात किए जाने वाले एल्यूमीनियम रेडिएटरों के सभी आयातों पर 22.89 यूएस डॉलर प्रति यूनिट की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई।

 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियम

संयुक्त राज्य अमेरिका को वाहन या वाहन पुर्जों को निर्यात करने से पहले, व्यक्ति को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि यह ‘पर्यावरण संरक्षण एजेंसी’ (ईपीए) नियमों के अनुरूप है।

अधिक जानकारी के लिए, https://help.cbp.gov/app/answers/detail/a_id/218/~/requirements-for-importing-a-vehicle-%2F-vehicle-parts

इस लिंक के जरिए ऑटोमोटिव क्षेत्र के विवरण के साथ-साथ निर्यातकों या आयातकों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले प्रमुख नियमों की जानकारी प्रदान की गई है।

https://www.gov.uk/guidance/automotive-import-and-export-regulations