ऑटो- पुर्जे उद्योग


 

परिदृश्य

भारतीय ऑटो-पुर्जे उद्योग को मोटे तौर पर संगठित और असंगठित क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है। संगठित क्षेत्र में मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) आते हैं और इसमें उच्च-मूल्य वाले उपकरण शामिल होते हैं। जबकि असंगठित क्षेत्र में कम मूल्य वाले उत्पादों का समावेश होता है और ये विनिर्माता द्वारा उत्पाद को बाजार में उतारने के बाद वाली श्रेणी में आते हैं, जिसे आफ्टर मार्केट क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। आफ्टर मार्केट में 21 प्रतिशत हिस्से के साथ‘ड्राइविंग ट्रांसमिशन और स्टीयिरंग’ उत्पाद श्रेणी का योगदान सबसे अधिक रहा। इसके बाद 18-18 प्रतिशत के साथ इंजन पुर्जों और इलेक्ट्रिकल्स का स्थान रहा। सस्पेंशन और ब्रेकिंग का योगदान 15-15 प्रतिशत रहा। भारत के जीडीपी में इस उद्योग का लगभग 2.3 प्रतिशत हिस्सा है और यह उद्योग प्रत्यक्ष तथा तथा परोक्ष रूप से करीब 30 लाख लोगों को रोजगार देता है।

पिछले एक दशक में ऑटो पुर्जा उद्योग का राजस्व वित्तीय वर्ष 2007-08 के 26.5 अरब यूएस डॉलर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017-18 में 51.2 अरब यूएस डॉलर हो गया तथा इस अवधि के दौरान इसमें 6.8 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई। स्टोरेज बैटरियों का उत्पादन 2016-17 के 1,18,713 से बढ़कर 2017-18 में 1,29,561 हो गया और इसमें 9.14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई। टायरों के उत्पादन में भी 5.5 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई और यह 2016-17 के 170,732.50 से बढ़कर 2017-18 (दिसंबर तक) में 180,260.70 हो गया।

भारत से ऑटो पुर्जों का निर्यात वर्ष 2018-19 में 1796.5 मिलियन यूएस डॉलर का रहा। वर्ष 2015-16 से 2018-19 के बीच स्टीयरिंग व्हील, स्टीयरिंग कॉलम और स्टीयरिंग बॉक्स (एचएस कोड: 870894) का निर्यात 48.7 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ा। अन्य पुर्जों और वाहनों (कैब सहित) की बॉडी की एसेसरीज (एचएस कोड: 870829) का निर्यात भी वर्ष 2015-16 के 62.9 अरब यूएस डॉलर के मुकाबले वर्ष 2018-19 में लगभग दोगुना बढ़कर 122.17 मिलियन यूएस डॉलर हो गया। वहीं, गियर बॉक्सों (एचएस कोड: 870840) और रेडिएटर (एचएस कोड: 870891) के निर्यात में वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2018-19 में क्रमशः (-) 0.3 प्रतिशत और (-) 0.6 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 2015-16 से 2018-19 के बीच बंपरों और उनके पुर्जों के निर्यातों में (-) 18 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

ऑटो-पुर्जों का श्रेणी-वार वैश्विक निर्यात
राशि मिलियन यूएस डॉलर में
एचएस कोड वस्तु 2015-16 2016-17 2017-18 2018-19
870810 बंपर और उसके पुर्जे 179.21 155.71 162.21 97.42
870829 बॉडी के अन्य पुर्जे और एसेसरीज (कैब सहित) 62.90 75.76 115.88 122.17
870830 ब्रेक और सर्वो-ब्रेक; उनके पुर्जे 308.77 342.17 419.70 418.71
870840 गियर बॉक्स 341.78 269.10 331.03 337.89
870850 अन्य ट्रांसमीटरों सहित डिफरेंशियल डब्ल्यू / एन के साथ ड्राइव एक्सल्स 193.52 204.17 342.67 313.11
870870 पहिये और उनके पुर्जे तथा एसेसरीज 93.04 107.45 133.81 141.65
870880 सस्पेंशन शॉक एब्जॉर्बर 82.85 89.74 129.38 120.04
870891 रेडिएटर 40.21 37.74 49.23 39.44
870893 क्लच और उसके पुर्जे 42.34 42.46 57.70 61.60
870894 स्टीयरिंग व्हील, स्टीयरिंग कॉलम और स्टीयरिंग बॉक्स 43.94 92.20 176.71 144.49
कुल 1388.56 1416.527 1918.324 1796.53
स्रोत: डीजीसीआईएस

भारतीय ऑटो-पुर्जों का वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक 34 प्रतिशत निर्यात यूरोप को रहा। इसके बाद उत्तर अमेरिका और एशिया को क्रमशः 28 प्रतिशत और 25 प्रतिशत निर्यात किया गया।

ऑटो पुर्जा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है, जो भारत सरकार द्वारा लागू नियमों और कानूनों के अधीन है। अप्रैल 2000 से जून 2018 की अवधि के दौरान ऑटोमोटिव क्षेत्र में 21.4 अरब यूएस डॉलर का एफडीआई आवक दर्ज किया गया।

ऑटोमोबाइल कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के पूर्वानुमानों के अनुसार, भारत से ऑटोमोबाइल पुर्जों का निर्यात वर्ष 2026 तक 80 अरब यूएस डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय ऑटो पुर्जा उद्योग का लक्ष्य 2026 तक 200 अरब यूएस डॉलर के राजस्व को प्राप्त करना है। वर्ष 2021 तक कुल बिक्री की 71 प्रतिशत खपत घरेलू बाजार में ही होने का अनुमान है, जो 115 अरब यूएस डॉलर का बाजार होगा। विभिन्न उत्पाद प्रकारों के लिहाज से देखा जाए तो संभावित शेयर के मामले में घरेलू और निर्यात दोनों बाजार लगभग समान हैं। उदाहरण के लिए, आईबीईएफ के अनुसार, 2020 में इंजन और एक्ज़ॉस्ट पुर्जों, बॉडी और संरचनात्मक पुर्जों की घरेलू बिक्री और निर्यात लगभग 50 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

बीएस VI मानदंड लागू होने से सभी ऑटोमोबाइल खंडों में मूल्य वृद्धि का अनुमान है और 2019-20 में सस्ते बीएस IV वाहनों की पूर्व खरीद से वाहनों की संख्या बढ़ने की भी संभावना है। भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड्स (बीएसईएस) मोटर वाहनों सहित इंजन और स्पार्क-इग्निशन इंजन उपकरण से वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन को विनियमित करने के लिए सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए उत्सर्जन मानक हैं। अच्छी घरेलू मांग और निर्यातों में वृद्धि के चलते 2019-20 में ऑटो-पुर्जा उद्योग में वृद्धि की संभावना है।

इस उद्योग का लक्ष्य है कि 2026 तक वाहनों की बिक्री 26 मिलियन से तीन गुना बढ़कर 76 मिलियन हो जाए। (यह संख्या ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2026 और थ्री-व्हीलरों की बिक्री पर विशेषज्ञों के इनपुट पर आधारित है।) इससे भारतीय ऑटोमोटिव पुर्जा उद्योग में भी वृद्धि होगी, जिसे 2026 तक जीडीपी में राशि के हिसाब से चार गुना और निर्यातों में 6 गुना योगदान बढ़ाने की उम्मीद है। मध्यम अवधि में इस उद्योग के लिए सकारात्मक परिदृश्य है।


 

चुनिंदा सरकारी प्रोत्साहन

  • ऑटोमोटिव मिशन योजना (एएमपी) 2016-26 सरकार ने 2015 में घोषित की थी, जिसमें 2026 तक इस क्षेत्र में चार गुना वृद्धि के साथ 65 मिलियन नौकरियों और देश की जीडीपी में 12 प्रतिशत के योगदान का लक्ष्य रखा गया था।
  • नेशनल ऑटोमोटिव टेस्टिंग एंड आर एंड डी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (नैट्रिप) की स्थापना 388.5 मिलियन यूएस डॉलर के फंड के साथ की गई थी। इसका उद्देश्य भारत में अत्याधुनिक परीक्षण, सत्यापन और शोध एवं विकास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है, ताकि भारत में वैश्विक मानकों को अपनाते हुए उन्हें लागू किया जा सके।
  • नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (एनईएमएमपी) के अंतर्गत फेम-इंडिया की शुरुआत 2015 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक प्रौद्योगिकी सहित सभी वाहन खंडों को प्रोत्साहित करना था। इस योजना को 1 अप्रैल, 2019 से 3 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर अपफ्रंट प्रोत्साहन देते हुए और इन वाहनों की चार्जिंग के लिए जरूरी बुनिया ढांचे का विकास करते हुए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की स्वीकार्यता को तेजी से बढ़ाना है। इस योजना से पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।
  • मई 2018 में चीन से बनने वाले या वहां से निर्यात किए जाने वाले एल्यूमीनियम रेडिएटरों के सभी आयातों पर 22.89 यूएस डॉलर प्रति यूनिट की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई।
  • बजट 2019-20में सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदढ़ किया और आयातित जीवाश्व ईंधन तथा गैस पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए 2030 तक 30 प्रतिशत इलेक्ट्रित वाहनों को सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा। राजस्व विभाग ने लीथियम-आयन सेल्स पर आयात शुल्क भी घटा दिया।

 

चुनिंदा निर्यात बाजार विनियम

संयुक्त राज्य अमेरिका को वाहन या वाहन पुर्जों को निर्यात करने से पहले, व्यक्ति को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि यह ‘पर्यावरण संरक्षण एजेंसी’ (ईपीए) नियमों के अनुरूप है।

अधिक जानकारी के लिए देखिएः https://help.cbp.gov/app/answers/detail/a_id/218/~/requirements-for-importing-a-vehicle-%2F-vehicle-parts

इस लिंक के जरिए ऑटोमोटिव क्षेत्र के विवरण के साथ-साथ निर्यातकों या आयातकों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले प्रमुख नियमों की जानकारी प्रदान की गई है।

https://www.gov.uk/guidance/automotive-import-and-export-regulations