इन्कोटर्म्स

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इन्कोटर्म्स क्या हैं और ये व्यापार के लिए कैसे उपयोगी हैं?

इन्कोटर्म्स यानी अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शर्तें। संक्षिप्त में इन्हें इन्कोटर्म्स कहा जाता है। दरअसल, ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए व्यापक रूप से स्वीकृत कुछ नियम होते हैं। ये नियम माल की डिलीवरी में शामिल दायित्व, लागत और जोखिमों के निर्धारण में मददगार होते हैं। डिलीवरी की शर्तों को इन्कोटर्म्स के माध्यम से कुशलतापूर्वक मानकीकृत किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय बिक्री करारों (कॉन्ट्रैक्ट) में इनका उपयोग करने से पार्टियां भी निश्चिन्त हो जाती हैं।

ये शर्तें 1923 में अंतरराष्ट्रीय चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विकसित और प्रकाशित की थीं। अब तक इनमें कई संशोधन हो चुके हैं। नवीनतम और वर्तमान संस्करण इन्कोटर्म्स 2010 है। हमेशा बदलते रहने वाले वैश्विक व्यापार परिदृश्य के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए व्यापार शर्तों में नवीनतम अपडेट का काम जारी है और 2020 में नई व्यापार शर्तें आने वाली हैं।

2010 के संस्करण में ग्यारह नियम या परिभाषाएं हैं, जिनमें से सात (पूर्व-डब्ल्यू, एफसीए, सीपीटी, सीआईपी, डीएटी, डीएपी और डीडीपी) परिवहन के सभी साधनों पर लागू होते हैं और शेष चार (एफएएस, एफओबी, सीएफटी और सीआईएफ) समुद्री और अंतरदेशीय जलमार्ग परिवहन पर लागू होते हैं। ये शर्तें अंतरराष्ट्रीय बिक्री और डिलीवरी के संबंध में 'कौन, क्या और कब' जैसे पहलुओं का निर्धारण करने में मदद करती हैं, जैसे:

  • विक्रेता और खरीदार के दायित्व क्या हैं
  • विक्रेता द्वारा कितनी लागत वहन की जाएगी और खरीदार द्वारा कितनी
  • संपत्ति विक्रेता से कब और कैसे खरीदार को हस्तांतरित होती है
  • सामान के विक्रेता से खरीदार तक पहुंचने में कौनसे जोखिम शामिल होते हैं

इस प्रकार इन्कोटर्म्स में उल्लिखित शर्तें, अंतरराष्ट्रीय करारों (कॉन्ट्रैक्ट) में इस्तेमाल होने वाली शर्तों को मानकीकृत और परिभाषित करती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में गलतफहमियों को रोकने में मदद मिलती है। इन्कोटर्म्स दायित्वों, लागत और जोखिमों को बिना किसी संदेह के निर्धारित करने में मददगार होती हैं। इससे करार करने वाली पार्टियां भी निश्चित रहती हैं कि उन्हें अपने दायित्वों और लागत का निर्वहन किस-किस अनुपात में करना है।

इन्कोटर्म्स में भुगतान दायित्व, पोत की आवश्यकताएं, करार की समाप्ति, दिवालियापन आदि के विवरण शामिल नहीं होते हैं। यानी ये बिक्री का संपूर्ण करार नहीं होती हैं। फिर भी इन्हें अधिकांश अंतरराष्ट्रीय करारों में स्पष्ट उल्लेख के साथ शामिल किया जाता है। अधिकांश घरेलू करारों में भी समान प्रकार की (उदाहरण के लिए फ्रॉ ऑन रोड) शर्तों का उपयोग किया जाता है।

इन्कोटर्म्स के माध्यम से माल के अंतरराष्ट्रीय बिक्री करार का मसौदा तैयार करना आसान हो जाता है। इसलिए, व्यापारिक कंपनियां, विशेष रूप से निर्यातक और आयातक कंपनियां अनिवार्य रूप से इनका इस्तेमाल करती हैं। इन्कोटर्म्स का उपयोग सेवाओं की खरीद-बिक्री के लिए नहीं किया जाता है। फिर भी, समुद्री परिवहन और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट बिजनेस, लॉजिस्टिक फर्म / कंपनियां, साख पत्रों में डील करने वाले बैंक और यहां तक कि व्यापार करने वाली कंपनियों / फर्मों को वित्त प्रदान करने वाले वित्तीय सेवा प्रदाता भी इन्कोटर्म्स का उपयोग करते हैं। वे खरीदारों और विक्रेताओं के दायित्वों को निर्दिष्ट करने के लिए इन शर्तों को शामिल करते हैं।

नवीनतम इन्कोटर्म्स 2010 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विभिन्न नए घटनाक्रमों को शामिल किया गया है। जैसे- कार्गो सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएं, मानक बीमा खंडों में परिवर्तन, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या दस्तावेजों का बढ़ता उपयोग, कार्गो से संबंधित जानकारी का आदान-प्रदान करने के दायित्व, लॉजिस्टिक्स व्यापार में नए घटनाक्रम, नए कंटेनराइजेशन और पॉइंट टू पॉइंट ट्रेड, ट्रेडिंग ब्लॉक के भीतर माल की आवाजाही, पारगमन में बिक्री और सीमा शुल्क मुक्त क्षेत्रों में फैलाव।

इसलिए, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न सभी पार्टियों को इन्कोटर्म्स को जानना चाहिए और उन्हें अपने करारों में शामिल करना चाहिए।

एक्स वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट क्या होता है और इसमें किसकी क्या जिम्मेदारी होती है?

एक्स वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट - यह विक्रेता और क्रेता के बीच माल की डिलीवरी से पहले किया गया एक कॉन्ट्रैक्ट होता है। इसमें विक्रेता की जिम्मेदारी इतनी ही होती है कि वह निर्धारित समयावधि में या तय तारीख को निर्धारित स्थान पर खरीदार को माल सौंप दे और माल उठाने के लिए उसे सूचित कर दे। इसमें माल के परिवहन और जोखिम संबंधी सारी लागत खरीदार को वहन करनी होती है।

इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि एक्स-वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट का यह मतलब नहीं है कि विक्रेता द्वारा माल खरीदार की फैक्ट्री तक ही डिलीवर किया जाएगा। इसमें खरीदार कॉन्ट्रैक्ट में निर्धारित स्थान से माल ले सकता है, जो विक्रेता का परिसर, कार्यस्थल, फैक्ट्री या गोदाम कुछ भी हो सकता है। बशर्ते कि वह निर्यात किए जाने वाले देश के भीतर हो।

इसमें माल को गाड़ी में लोड कराने या निर्यात के लिए कस्टम्स से मंजूरी लेने आदि की जिम्मेदारी विक्रेता की नहीं होती है। यदि खरीदार खुद विक्रेता से माल को लोड कराने के लिए कहता है तो विक्रेता खरीदार के खर्च और खरीदार के ही जोखिम पर माल लोड करा सकता है। लेकिन यह विक्रेता की बाध्यता नहीं है। वह खरीदार को इसके लिए मना भी कर सकता है।

इसके अंतर्गत विक्रेता को माल से संबंधित कमर्शल इन्वॉइस और खरीदार द्वारा किए गए अनुरोध के मुताबिक कस्टम्स आदि से मंजूरी या कार्गो सुरक्षा या माल के परिवहन के लिए अन्य आधिकारिक अधिकार पत्र जैसे सभी जरूरी दस्तावेज खरीदार को सौंपना अनिवार्य है।

विक्रेता को माल के परिवहन के लिए अपने निर्धारित डिलीवरी स्थल से आगे का बीमा कराने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि उसे खरीदार को यह बता देना चाहिए, ताकि आगे के परिवहन के लिए बीमा वह खुद करा सके।

विक्रेता को पूर्व में सहमत अनुसार समुचित ढंग से माल की पैकेजिंग करानी होती है और उन पर अच्छे तरीके से नाम लिखवाना होता है। डिलीवरी से पहले गुणवत्ता परीक्षण, नपाई-तुलाई या गिनती संबंधी सभी खर्च विक्रेता द्वारा ही वहन किए जाते हैं।

यदि खरीदार द्वारा किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करने या दस्तावेज हासिल करने में किसी प्रकार का खर्च किया जाता है तो विक्रेता को इसकी प्रतिपूर्ति करनी होती है, जब तक कि कॉन्ट्रैक्ट में अलग से उल्लेख न किया जाए कि इस प्रकार के खर्च कॉन्ट्रैक्ट की लागत में ही शामिल हैं।

इसमें विक्रेता द्वारा सूचित किए जाने के बाद निर्धारित समयावधि में माल को निर्धारित स्थान से उठवाने की प्राथमिक बाध्यता खरीदार की ही रहती है। इसी समय खरीदार को सहमत अनुसार, माल की डिलीवरी का भुगतान करना होता है। साथ ही, सहमत अनुसार डिलीवरी का प्रमाण देना भी आवश्यक होता है।

एक बार माल की डिलीवरी हो जाने के बाद हर लागत और जोखिम खरीदार का हो जाता है। डिलीवरी लेने में देरी के चलते बीमा, स्टोरेज जैसी किसी भी तरह की अतिरिक्त लागत का वहन खरीदार को स्वयं करना होता है। माल की डिलीवरी पर परिवहन और बीमा संबंधी खर्च भी खरीदार द्वारा ही वहन किए जाते हैं। डिलीवरी के बाद प्री-शिपमेंट निरीक्षण, सभी ड्यूटी और कर तथा कस्टम्स से मंजूरी संबंधी हर तरह के खर्च खरीदार द्वारा ही वहन किए जाते हैं।

सामान्यतया, एक्स-वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट उस स्थिति में किए जाते हैं, जब खरीदार के पास उसका अपना लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता हो (सामान्यतया मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर), जो निर्धारित स्थान से खरीदार की तरफ से माल उठा सके, अंतर्देशीय परिवहन की व्यवस्था कर सके, निर्यात किए जा रहे देश में कस्टम्स से मंजूरी दिला सके और वहां से माल को सीमा-पार भिजवा सके।

इन्कोटर्म्स2020का परिचय

इन्कोटर्म्स यानी अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शर्तें। संक्षिप्त में इन्हें ही इन्कोटर्म्स कहा जाता है। दरअसल, ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए व्यापक रूप से स्वीकृत कुछ नियम होते हैं। ये नियम माल की डिलीवरी में शामिल दायित्व, लागत और जोखिमों के निर्धारण में मददगार होते हैं एक्ज़िम मित्रपर इन्कोटर्म्स2020का विवरणदेने का उद्देश्य,नवीनतम अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शर्तों को समझने में मदद करना है। इन नियमों का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय वाणि‍ज्य मंडल (ICC)द्वारा किया गया है। नवीनतम ट्रेडमार्क के अनुसार इन्हें इन्कोटर्म्स®2020कहा जाता है, लेकिन सुविधा के लिए यहां इन्कोटर्म्स 2020ही लिखा जा रहा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन्कोटर्म्स2020 को मूल ट्रेडमार्क के विकल्प के रूप में नहीं लिया जा सकता।उपयोगकर्ताओं से हमारा विशेष अनुरोध है कि वे आईसीसी के मूल प्रकाशनइन्कोटर्म्स2020 का संदर्भ लें। यह प्रकाशन आईसीसी के नए ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म https://2go.iccwbo.org/explore-our-products/ebooks.html https://2go.iccwbo.org/explore-our-products/ebooks.htmlपर मुद्रित एवं डिजिटल पुस्तक के रूप में उपलब्ध है।पुस्तक आईसीसीइंडिया के वेब लिंक http://www.iccindiaonline.org/icc-two/Incoterms2020.html से भी खरीदी जा सकती है। नए नियमों की पुस्तक के अलावा, आईसीसी ने एक पॉकेट गाइड और दीवार चार्ट भी प्रकाशित किया है।

आईसीसी ने पहली बार 1923 में ये नियम बनाए और प्रकाशित किए थे। इन्कोटर्म्स2020इनका नवीनतम और दसवां संस्करण है। यह 1 जनवरी, 2020 से लागू है।नई तकनीकें, सरकार की नीतियां और पर्यावरण संबंधीनए नियमों के परिप्रेक्ष्य में इन्कोटर्म्स2020अंतरराष्ट्रीयखरीदारों और विक्रेताओं को एक अद्यतित नियमावलीप्रदान करता है। ये नियम बाजार व्यवहार में परिवर्तन को दर्शाते हैं और पिछले संस्करणों की तुलना में इनकाउपयोग करना आसान है।

इन्कोटर्म्स2020का प्रारूप89 ICCराष्ट्रीय समितियों और उद्योग विशेषज्ञ समूहों के सहयोग से तैयार किया गया। इसके लिए अर्थशास्त्रियों, वकीलों, व्यापारियों, माल भाड़ाप्रेषकों और बैंकिंग तथा बीमा विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिए गए।

इन्कोटर्म्स2020का प्राथमिक उद्देश्य है- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न क्रेता और विक्रेता केदायित्वों को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करना। साथ ही यह निर्दिष्ट करना कि विक्रेता से क्रेता को जोखिम कब और कैसे हस्तांतरित होते हैं, ये जोखिम कौनसे होते हैं और क्रेता तथा विक्रेता द्वारा कितनी-कितनी लागत वहन की जानी चाहिए।

इन्कोटर्म्स2020पुस्तक के कवर पर उल्लिखित है कि ये ‘अंतरराष्ट्रीय और घरेलू व्यापार शर्तों के उपयोग के लिएआईसीसी नियम’।पुस्तक में सबसे पहले आईसीसी के महासचिव, जॉन डेंट्रॉन का वक्तव्य दिया गया है, इसके बाद आईसीसी के विशेष सलाहकार,चार्ल्स डेबेटिस्टा द्वारा इन्कोटर्म्स2020का परिचय दिया गया है। उन्होंने आसान शैली में बताया है कि नए नियमों में क्या है और क्या नहीं। इसमें उन्होंने नियमों के बारे में सामान्य जानकारी दी है और बताया है कि व्यापारी अपने लेन-देन के लिए सबसे अच्छा नियम कैसे चुन सकते हैं और इन्कोटर्म्स2010 में कौन-कौन से बड़े बदलाव हुए हैं।उन्होंने इन्कोटर्म्स के नियमों कोकॉन्ट्रैक्ट में शामिल करने के लिए सर्वोत्तम उपायों को भी रेखांकित किया है। औरयह बताया है कि सहायक कॉन्ट्रैक्ट के साथ सेलकॉन्ट्रैक्ट का संबंध कैसा हो। जोखिम और डिलीवरी की अवधारणाओं के बारे में बताया है, वाहक की भूमिका का उल्लेख किया है और इन्कोटर्म्स2020के अन्य नियमों का उपयोग करते हुए जो सावधानी बरती जानी चाहिए, उसका भी उल्लेख किया है।यह परिचय नए नियमों को समझने में मदद करता है लेकिन ये मूल नियमों का हिस्सा नहीं है।

नए प्रकाशन में एक दिलचस्प ख़ासियत यह भी है कि इसमें नियमों की प्रस्तुति रंगीन रेखाचित्रों के जरिएकी गई है,जो डिलीवरी पाइंट और पार्टियोंके दायित्वों के असर, लागत और जोखिमों को दर्शाती हैं।

इन्कोटर्म्स2020में, उपयोगकर्ता अपेक्षित लागतों की पूरी सूचीएक नज़र में देख सकते हैं।इसके अलावा, प्रत्येक आइटम की लागत उस आइटम से संबंधित आलेखों में भी दी गई है, ताकि किसी वस्तु विशेष के बिक्री लेनदेन पर जानकारी चाहनेवाले उपयोगकर्ता को आसानी रहे।

इन्कोटर्म्स2020प्रकाशनों की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें प्रत्येक इन्कोटर्म्स नियम से पहले उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए व्याख्यात्मक नोटदिए गए हैं।ये नोट उपयोगकर्ताओं को इन्कोटर्म्स नियमों के नवीनतम संस्करण की सही व्याख्या समझाने में सहायता करते हैं।

https://populareducation.in/wp-content/uploads/2018/12/JINDAGI-PAR-MANDRATE-PARMANU-KE-BADAL.pdf

इन्कोटर्म्स 2010 और इन्कोटर्म्स 2020 के बीच मुख्य अंतर

इन्कोटर्म्स2020का प्राथमिक उद्देश्य है- अंतरराष्ट्रीय व्यापार लेनदेन में क्रेताऔर विक्रेता केदायित्वों को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करना। साथ ही यह निर्दिष्ट करना कि विक्रेता से क्रेता को जोखिम कब और कैसे हस्तांतरित होते हैं, ये जोखिम कौनसे होते हैं और क्रेता तथा विक्रेता द्वारा कितनी-कितनी लागत वहन की जानी चाहिए।

तथापि, 2010 वालेसंस्करण में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।इन्कोटर्म्स नियम मुख्यतः डिलीवरी के बारे में हैंऔर प्रमुख बदलाव भी इसी हिस्से में किए गए हैं। इन्कोटर्म्स नियमों की व्याख्या के संबंध मेंकानूनी केसभी बहुत कमहैं।बल्किजो मामले आए हैं, वे आमतौर पर किसी इन्कोटर्म्स नियम के गलत प्रयोग के कारण आएहैं।नए नियमों का परिचय खरीदारों और विक्रेताओं को सही इन्कोटर्म्सनियमोंके स्पष्ट प्रयोग कीजानकारीदेता है। हर नियम के लिए व्याख्यात्मक नियम बना देने से अधिक स्पष्टता आ गई है।रंगीन रेखा-चित्रपॉइंट ऑफ डिलीवरी को समझने में मददगार हैं। प्रत्येक नियम मेंदायित्वों, डिलीवरीपॉइंट, लागत आदि का उल्लेखहै। इसकेअतिरिक्त, अलग से तुलना भी दी गई है कि प्रत्येक नियम दायित्वों, डिलीवरी, लागत आदि से कैसे डील करता है। कौनसे नियम में क्या कवर किया गया है और क्या नहीं।

इसके अलावाकई सूक्ष्म परिवर्तन और भीहैं।

पिछले नियमों की तुलना में नए नियमों मेंइस बात पर अधिक जोर दिया गया है किकंटेनर शिपमेंट के लिएसमुद्र या अंतरदेशीय जलमार्गों द्वारा परिवहन के नियमों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, भले ही वे समुद्र के रास्ते ले जाए जा रहे हों।

इन्कोटर्म्स 2020 में फ्री कैरियर (FCA) को संशोधित किया गया है ताकि ऐसी स्थिति को इसमें शामिल किया जा सके, जहां माल बिकने के बाद समुद्र के रास्ते ले जाना हो और क्रेता या विक्रेता (अथवादोनों पक्षों के बैंक) द्वारा माल के लदान के बाद उसके लदान बिल का अनुरोध किया जाए। अब एफसीए में यह प्रावधान है कि दोनों पक्ष इस पर सहमत हों किमाल के ऑन-बोर्ड लदान के बाद क्रेताकैरियरको निर्देश देगा कि वह विक्रेता को ऑन बोर्ड लदान बिल प्रदान करे और विक्रेता के लिए यह निर्देश होगा कि इसके बाद वह क्रेता को दस्तावेज दे(अक्सर बैंकों के जरिए दिए जाते हैं)।

इन्कोटर्म्स2020में, उपयोगकर्ता संभावित लागतों की पूरी सूचीएक नज़र में देख सकते हैं।इसके अलावा, प्रत्येक आइटम की लागत आइटम से संबंधित आर्टिकलमें भी उल्लिखित होती है, ताकि किसी वस्तु विशेष के बिक्री के बारे में जानकारी चाहने वाले उपयोगकर्ता को आसानी रहे।

विभिन्न स्तरों पर बीमा कवरेज प्रदान करने के लिएइन्कोटर्म्स2020 में,लागत बीमा और माल भाड़ा (CIF) नियमएवं ढुलाई तथा बीमा लागत (CIP) नियम बनाए गए हैं। सीआईएफ इन्कोटर्म्स नियम समुद्री व्यापार में प्रयोग के लिएहैं और अक्सर कमोडिटी ट्रेडिंग में उपयोग में लाए जाते हैं। इसके अंतर्गतद इंस्टीट्यूट कार्गो क्लॉज (C)होता है, जिसमें कवरेज का डिफ़ॉल्ट स्तर होता है। यह दोनों पक्षों को उच्चतर बीमा कवर के लिए सहमति का विकल्प देता है। वैश्विक उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया लेते हुए, सीआईपी इन्कोटर्म्सनियम में अब उच्चतर स्तर के कवर की आवश्यकता है, जो द इंस्टीट्यूट कार्गो क्लॉज (A) अथवासमान क्लॉज के अनुपालन में हो।

इन्कोटर्म्स2020में इस बात का ध्यान रखा गया है कि विक्रेता द्वाराक्रेताको किए जाने वाले सभी वाणिज्यिक लेनदेनकिसी थर्ड पार्टी कैरियर द्वारा ही किए जाते हैं।कुछ मामलों में, लेनदेन बिना थर्ड पार्टी कैरियर के कर लिए जाते हैं। जैसे कई बार विक्रेता परिवहन के लिए निजी साधनों का उपयोग करते हैं, या कोईक्रेतामाल लेने के लिए अपने निजी वाहन का उपयोग करता है।

सुरक्षा-संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन्कोटर्म्स2010 मेंकुछ नियम बनाए गए थे। अब इन्कोटर्म्सनियमों के नवीनतम संस्करण में सुरक्षा-संबंधी इन दायित्वों को औरअधिक स्पष्ट तथा पहले से अधिक विस्तृत कर दिया गया है।

पूर्व में इस्तेमाल होने वाले डिलीवर एट टर्मिनल (DAT) को डिलीवर एट प्लेस अनलोडेड (DPU) में बदल दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इस बात पर जोर दिया जा सके कि गंतव्य स्थानकेवल "टर्मिनल"ही नहीं, बल्कि कोई भी स्थान हो सकता है। और डिलीवर एट प्लेस अनलोडेड (DPU) में किए गए इससंशोधन का एकमात्र उद्देश्य यह बताना है कि डीएपी के तहत विक्रेता सामान को अनलोड नहीं करता है, जबकि डीपीयू के तहतविक्रेता सामान को अनलोड भी करता है।और चूंकि डीएपी के तहत डिलीवरी अनलोडिंग से पहले हो जाती है, इसलिए इन्कोटर्म्स2020में डीएपी का नाम परिवर्तित कर डीपीयूकर दिया गया है।

इन्कोटर्म्स 2020किससे संबंधित हैं और किससे नहीं हैं?

इन्कोटर्म्स क्रेता और विक्रेता के बीच के मामलों यानी दायित्व, लागत और जोखिमों से संबंधित होते हैं।इनके अलावा, अन्य सभी मामले विक्रेता और क्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से हल होने चाहिए।इन्कोटर्म्स के तीन अक्षर संक्षिप्तिकरण कोकॉन्ट्रैक्टमें शामिल किया जाता है,लेकिन येकॉन्ट्रैक्टके विकल्प नहीं हैं।

वस्तुतःइन्कोटर्म्स इससे संबंधित नहीं होते कि कोई कॉन्ट्रैक्ट है या नहीं,अथवा यदि कोई कॉन्ट्रैक्ट है भी, तो इन्कोटर्म्स यह निर्धारित नहीं करते कि कॉन्ट्रैक्ट किस कानून के तहत हो। बल्कि कई कॉन्ट्रैक्ट में कई पार्टियां भी लागू कानून का उल्लेख नहीं करती हैं, जो कि उन्हें करना चाहिए। ऐसा करने में, निश्चित रूप से उन पर डिलीवरी का स्थान निर्धारण करने और अन्य दायित्वों के लिए इन्कोटर्म्स लागू होंगे।

यदि दायित्व पूरा करने में चूक होती है तो पार्टियां उससे कैसे निपटेंगी, यदि माल तय शर्तों के अनुसार नहीं है या माल भेजने में चूक होती है या देरी होती है, उस स्थिति में विवादों को कैसे सुलझाया जाएगा। ये सब बातें कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी हैं, न कि इन्कोटर्म्स से। कॉन्ट्रैक्टमें दायित्व तो निर्दिष्ट होते हैं, लेकिन उनके पूरे न हो पाने की स्थिति के लिए कोई परिणाम उनमें नहीं होता है। इसी तरह, फोर्स मेजर क्लॉज(अप्रत्याशित घटना या प्राकृतिक आपदा) और विनियामकों द्वारा प्रतिबंधों के परिणाम भी कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा होना चाहिए। इन्कोटर्म्स इस सबसे संबंधित नहीं हैं।

माल की विशिष्टता या प्रकृति कॉन्ट्रैक्ट संबंधी मामला है।हालांकि इन्कोटर्म्स मालकी जांच, पैक करने और चिह्नित करने के विक्रेता के दायित्वों से संबंधित होते हैं, तथापि पैकेजिंग के तरीके (जैसे रेफ्रिजरेशन), विशेष हैंडलिंग (जैसे खतरनाक माल के लिए) आदि कॉन्ट्रैक्ट का ही हिस्सा होते हैं।

इसमें ध्यान देने वाली एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इन्कोटर्म्स2020 का संपत्ति के हस्तांतरण, बेची गई वस्तुओं केस्वामित्वअथवाउनके हक वि‍लेख से कोई लेना-देना नहीं है।यहमहत्त्वपूर्ण है कि संपत्ति विक्रेता से क्रेता तक कैसे और कब पहुँचती है।आमतौर पर, यह डिलीवरीकी जगह पर होना चाहिए, लेकिन यह कभी-कभी माल के हक विलेख के दस्तावेजों के डिस्पैच / डिलीवरी के जरिए भी कर लिया जाता है।यह एक कानूनी मामला है और अक्सरऐसे मामलों पर स्थानीय कानून लागू होतेहैं, इसलिए इन पहलुओं को कॉन्ट्रैक्टमें शामिल किया जाना चाहिए।

इन्कोटर्म्स2020 निर्यातक या आयातक देश में सीमा शुल्क के भुगतान संबंधी दायित्वों से डील करते हैं। हालांकि, शुल्क की दरें या सीमा शुल्क का मूल्य इन्कोटर्म्सका हिस्सा नहीं बन सकते।इन्हें कॉन्ट्रैक्टमें शामिल किया जाना चाहिए, जहां शुल्कों में उतार-चढ़ाव को कवर करने वाले खंड को शामिल किया जाताहै।

एक अन्य महत्त्वपूर्ण पहलू भुगतान का समय और तरीका है। यानी बिक्री उधार पर है या नकदी पर 30 दिन की उधारी पर है या साख-पत्र के एवज में है। ये कॉन्ट्रैक्टमें शामिल किए जाने वाली बातें हैं। इन्कोटर्म्स2020में इनसे डील नहीं करते।

इन्कोटर्म्स2020 वैरिफाइड ग्रोस मास (VGM)से डील नहीं करते हैं। कार्गो को ले जाने वाले कंटेनर के डुनेज और ब्रेसिंग प्लस के वजन सहित कार्गो का वजन वीजीएम कहलाता है।सोलास (समुद्र में सुरक्षा) विनियमन में जहाज पर लदान से पहले, शिपर को शिपिंग निर्देश के तहत या किसीमाध्यम से शिपिंग दस्तावेज में वीजीएम प्रदान करना अपेक्षित है। यह वायु, सड़क, रेल अथवा बल्क लदान के बजाय,मुख्य रूप से कंटेनर शिपमेंट के संबंध में ही करना चाहिए।परिस्थितियों के आधार पर, विशेष रूप से एलसीएल (कंटेनर लोड से कम) लदान में, ये दायित्व क्रेता, विक्रेता या फारवर्डर को सौंप दिए जाते हैं।इसलिए, इस मामले को कॉन्ट्रैक्ट में शामिल किया जाना चाहिए।

इन्कोटर्म्स2020 को सभी जगह लागू किया जाता है और इसलिए यह देश या क्षेत्र विशेष के मामलों या विक्रेता / क्रेतासंबंधी मामलों जैसे कि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) अथवा व्यवसाय से उपभोक्ता बिक्री, विशेष रूप से ई-कॉमर्स या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापार नहीं करता है।

एफएएस, एफओबी, सीएफआर, तथा सीआईएफ के तहत डिलीवरी

फ्री अलॉन्गसाइड शिप (एफएएस)का मतलब है कि विक्रेता सामान को शिपिंग स्थल तक पहुंचा देता है। यह स्थान क्रेता द्वारा बताए लोडिंग पॉइंट के अनुसार जेटी या नौका या क्रेता द्वारा शिपमेंट के लिए बताया गया कोई बंदरगाह भी हो सकता है या विक्रेतासामान की खरीदी कर क्रेता द्वारा सहमत तारीख या अवधि के भीतर बंदरगाह पर पहुंचा देता है। जब माल डिलीवर किया जाए, तब वेसेल भी वहां हो। अन्यथा यह डिलीवरी एफएएस के अंतर्गत नहीं मानी जाएगी।

फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी) का मतलब है किविक्रेता सामान को क्रेताद्वारा शिपमेंट के लिए बताए गए बंदरगाह तक नौका पर लादकर डिलीवरी कर देता है। या माल की खरीदी करइसे नियत तारीख या अवधि के अंदर बंदरगाह तक पहुंचा देता है।

एफएएस और एफओबी दोनों में, क्रेता का मुख्य दायित्व विक्रेता को समय रहते नौका का नाम और उस बंदरगाह पर लोडिंग पॉइंट बताना है, जिससे कि वह सामान डिलीवर कर सके। विक्रेता को मालवाहक के साथ इसमाल को भेजने के लिएकिसी प्रकार केकॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने का कोई दायित्व नहीं है।यदि क्रेता इसके लिए अनुरोध करता है तो विक्रेता अपने विकल्प के अनुसार ऐसा कर सकता है, किन्तु इसकी लागत और जोखिम क्रेता को उठाना होगा। यदि विक्रेता ऐसा नहीं करता है, तो उसे क्रेता को अवश्य सूचित करना चाहिए।

लागत, ढुलाई भाड़ा एवं बीमा (सीआईएफ) के साथ-साथ ‘लागत एवं ढुलाई भाड़ा’ (सीएफआर) के तहतडिलीवरी तब मानी जाती है, जब विक्रेता शिपमेंट के लिए क्रेता द्वारा बताए गए बंदरगाह पर नौका में माल लाद देता है या नियत अवधि में या नियत तारीख को माल खरीदकर बंदरगाह पर डिलीवर कर देता है। इसमें विक्रेता को कैरियर के साथ माल लदान वाले बंदरगाह से गंतव्य बंदरगाह तक के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करना जरूरी है।

एफओबी, सीएफआर और सीआईएफ में ध्यान देने वाला एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सामान को जहाज के डेक पर या जहाज में सुरक्षित तरीके से रखा जाना चाहिए। जहाज के रेलिंग क्रॉस करने वाली अवधारणा इन्कोटर्म्स 2010 में ही खत्म कर दी गई थी।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि एफओबी, सीएफआर और सीआईएफ को कंटेनर शिपमेंटया यहां तक कि कंटेनर से कम लोड के लिए भी नहीं चुना जाना। इसका मुख्य कारण यह है कि आमतौर पर, कंटेनरों को बंदरगाहों या अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में कंटेनर यार्ड में शिपिंग लाइनों तक पहुंचाया जाता है।जब तक ऐसा होता है, तब तक संभवतः जहाज नहीं पहुंचा होता है।वास्तव में, यह कैरियर होता है जो जहाज के पहुंचने पर कंटेनर को नौका पर लोड करता है।यदि कंटेनर में कम माल लोड है, तो पैकेज आमतौर पर कंटेनर ढुलाई स्टेशनों पर जाते हैं, जहां उन्हें बंदरगाह पर पहुंचाए जाने से पहले उन कंटेनरों के साथ भर दिया जाता है, जिनमें कंटेनर से कम लोड होता है। अतःकंटेनर लोड या कम कंटेनर लोड के मामले मेंवरीयतन एफओबी, सीएफआर या सीआईएफ के बजाय एफसीए, सीआईपी या सीपीटी काविकल्पअपनाना चाहिए।इसका मतलब यह है कि एफओबी, सीएफआर या सीआईएफ शब्द को आमतौर पर थोक या गैर-कंटेनरीकृत कार्गो के लिए चुना जाना चाहिए, जहां विक्रेता का दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि कार्गो जहाज के डेकपर या जहाज में रखा गयाहै।

इन सभी मामलों में, विक्रेता को डिलीवरी का साक्ष्य क्रेता को भेजना चाहिए। सहमति अनुसार, परिवहन दस्तावेज विक्रेता द्वारा प्राप्त कर क्रेता को भेज देनेचाहिए, ताकि भेजे गए माल को क्रेता बंदरगाह से प्राप्त कर सके।एफएएस, एफओबी और सीएफआर के मामले मेंविक्रेता को सभी आवश्यक शिपमेंट विवरण के बारे में क्रेता को सूचित करना चाहिए, ताकि वह बीमा ले सके।

एफसीए, सीपीटी तथा सीआईपी शर्तों के तहत डिलीवरी

‘फ्री कैरियर’ (ढुलाईकर्ता) (एफसीए) में विक्रेता को क्रेता द्वारा नामित ढुलाईकर्ताया किसी अन्य व्यक्ति को क्रेता द्वारा निर्धारित स्थान पर, यदि कोई हो, नियत तारीख या अवधि के भीतर,माल की डिलीवरी करना अपेक्षित होता है। डिलीवरी निर्यात के लिए सीमा शुल्क क्लीयरैंस से पहले या बाद में की जा सकती है।इसे कॉन्ट्रैक्ट में स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए।

विक्रेता का ढुलाईकर्ताके साथ किसी प्रकार का कॉन्ट्रैक्ट करने का कोई दायित्व नहीं होता है।क्रेता द्वारा अनुरोध करने पर या इसके विपरीत क्रेता द्वारा निर्देश दिए जाने पर वह क्रेता के जोखिम एवं खर्चों पर सामान्य नियम एवं शर्तों पर साधन के लिए संपर्क कर सकता है। ऐसे मामले में,उसे किसी भी सुविधाजनक साधन के जरिए खरीदार को डिस्पैच विवरण और परिवहन संबंधी दस्तावेज देना जरूरी है। यदि क्रेता, विक्रेता से साधन के लिए कॉन्ट्रैक्टकरने का अनुरोध करता है, किन्तु विक्रेता ऐसा नहीं करना चाहता है, तो उसे क्रेता को ऐसा करने से मना करने का नोटिस देना होगा।

डिलीवरी तब पूरी मानी जाती है, जब सामान ढुलाईकर्ता तक सही तरीके से पहुंचा दिया जाता है या नामित व्यक्ति को सौंप दिया जाताहै।हालांकि, यदि निर्धारित स्थान विक्रेता का परिसर है, तो क्रेता द्वारा उपलब्ध कराए गए परिवहन के साधनों पर माल लोड होने पर ही डिलीवरी पूरी होती है।विक्रेता को बीमा लेने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन विक्रेता को आवश्यक जानकारी क्रेता को जरूर दे देनी चाहिए, ताकि आगे का बीमा वह करा सके। क्रेताद्वारा विशेष अनुरोध करनेपर विक्रेता, क्रेता की लागत और जोखिम पर बीमा निकाल सकता है।

क्रेता का मुख्य दायित्व विक्रेता को माल भेजने के लिए पर्याप्त समय के भीतर मालवाहक या नामित व्यक्ति का नाम सूचित करना है।निर्धारित डिलीवरी अवधि के भीतर विक्रेता कोसमय का चयन करना चाहिए कि ढुलाईकर्ताया नामित व्यक्ति डिलीवरी कब लेगा।उसे विक्रेता को नामित व्यक्ति द्वारा उपयोग किए जाने वाले परिवहन के साधन और निर्दिष्ट स्थान परडिलीवरी लेने के बारे में भी सूचित करना चाहिए।उसे मंजूर शर्तों के तहत माल की डिलीवरी लेनी चाहिए और माल की डिलीवरी होने के बाद सहमत मूल्य पर विक्रेता को भुगतान करना चाहिए।

यह भी उल्लेखनीय है कि जब डिलीवरी स्थानविक्रेता के परिसर में न होकर कोई अन्य स्थान हो तो विक्रेता का दायित्व क्रेता या ढुलाईकर्ताद्वारा निर्धारित स्थान पर करना हो जाता है।किन्तु विक्रेता ऐसे स्थान पर माल कोअपने साधनों से उतारने के लिए बाध्य नहीं है।हो सकता है कि उसके पास कार्गो को उतारने के लिए पर्याप्त साधन या उपकरण न हों या कई बार तो सुरक्षाऔर अन्य परिचालन कारणों से भी उसे ऐसा करने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।

एफसीए का उपयोग परिवहन के किसी साधन या साधनों के लिए किया जा सकता है।बहुत बार माल समुद्र या अंतर्देशीय जलमार्ग सहित परिवहनके विभिन्न साधनों के जरिए पहुंचता है। जहां मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर आद्योपांत परिवहन की जिम्मेदारी लेते हैं, वहां एफसीए का उपयोग जरूर किया जाना चाहिए।जहां केवल एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तकशिपमेंट करना है, वहां भी सभी कंटेनरीकृत कार्गो के लिएएफसीए का उपयोग जरूर किया जाना चाहिए। क्योंकि विक्रेता केवल अंतर्देशीय कंटेनर डिपो या बंदरगाहों के पास निर्दिष्ट कंटेनर यार्ड में शिपिंग लाइनों को कंटेनर की डिलीवरीकर सकते हैं।

कैरिज पेड टू (सीपीटी) और कैरिज तथा प्रदत्त बीमा (सीआईपी) शर्तें विक्रेता पर डिलीवरी की समान जिम्मेदारी तय करती हैं। क्रेतापर भी ऐसे ही समान दायित्व होते हैं, लेकिन उसे अतिरिक्त चेतावनी दी जाती है कि उसे गंतव्य स्थान पर भौतिक रूप से मालप्राप्त करना चाहिए।

ध्यान देने वाली महत्त्वपूर्ण बात है कि एफसीए, सीआईपी और सीपीटी मेंडिलीवरी तब ही मान ली जाती है जब विक्रेता माल को मालवाहक के पास भेज देता है, न कि तब जब माल गंतव्य स्थान पर पहुंच जाता है।

इनकोटर्म्स नियम कैसे निर्धारित किए जाते हैं

2010 के नियमों की ही तरह इन्कोटर्म्स 2020 में 11 नियम हैं। इन्हें दो खंडों में विभाजित किया गया है। इनमें से 7 परिवहन के किसी भी माध्यम या माध्यमों के जरिए और 4 समुद्री तथा अंतर्देशीय जलमार्गों द्वारा परिवहन के लिएहैं।प्रत्येक नियम के शीर्षक में तीनअक्षरों वालासंक्षिप्त नाम है, इसके बाद उस नियम का नाम है और फिर इनके उपयोग का सही तरीका। अर्थात् संक्षिप्त नाम के बाद संबंधित स्थान बताया गया है। यहां इन नियमों के 11 शीर्षक नीचे दिए गए हैं। ये 2010 के नियमों के समान ही हैं, सिर्फ डीएटी (टर्मिनल पर डिलीवरी) के स्थान पर डीपीयू (डिलीवर और अनलोड किए जाने वाला स्थान) किया गया है।

परिवहन के माध्यम या माध्यमों के लिए नियम

  1. एक्सडब्ल्यू – एक्स वर्क्स (डिलीवरी के स्थान का नाम बताता है)
  2. एफसीए - फ्री कैरियर (डिलीवरी के स्थान का नाम बताता है)
  3. सीपीटी – कैरिज पेड टू (गंतव्य स्थान का नाम बताता है)
  4. सीआईपी – कैरिज इंश्योरैंस पेड (गंतव्य स्थान का नाम बताता है)
  5. डीएपी – डिलीवर्ड एट प्लेस (गंतव्य स्थान का नाम बताता है)
  6. डीपीयू - डिलीवरी एट पलेस अनलोडेड(गंतव्य स्थान का नाम बताता है)
  7. डीडीपी – डिलीवरी ड्यूटी पेड (गंतव्य स्थान का नाम बताता है)

समुद्री और अंतर्देशीय जलमार्गपरिवहन के लिए नियम

  1. एफएएस - फ्री अलॉन्गसाइड शिप (लोडिंग बंदरगाह का नाम बताता है)
  2. एफओबी – फ्री ऑफ बोर्ड (लोडिंग बंदरगाहका नाम बताता है)
  3. सीएफआर – कोस्ट एंड फ्रेट (गंतव्य बंदरगाह का नाम बताता है)
  4. सीआईएफ - कोस्ट इंश्योरैंस एंड फ्रेट CIF – Cost Insurance and Freight (गंतव्य पोर्ट का नाम बताता है)

प्रत्येक नियम में एक रेखाचित्र दिया गया है। इनमें नीला रंग विक्रेता के दायित्वों को दर्शाता है। सुनहरा रंग खरीदार के दायित्वों को और कुछ नियमों में हरा रंग दोनों के समान दायित्वों को दर्शाता है। इसका उद्देश्य यही है कि पाठकों को नियम समझने में आसानी हो। स्वाभाविक है कि ये रेखाचित्र वास्तविक नियमोंका हिस्सा नहीं हैं।सभी नियमों के लिए प्रयोग में लाए गए रंग मानक रखे गए हैं।

प्रत्येक नियम मुख्य रूप से किसी प्रासंगिक पहलू को स्पष्ट करने के लिएइसकी व्याख्या करता है।ये व्याख्याएं नियमों का हिस्सा नहीं हैं। इनमें रेखाचित्र शामिल हैं, ताकि व्याख्या में बताए गए बिंदु आसानी से समझे जा सकें। यहां शामिल किए गए रंगों में काला,कार्गो (बॉक्स के रूप में बनाया गया) की डिलीवरी को दर्शाता हैतथा ग्रे दर्शाता है कि कार्गो कहीं और है।

प्रत्येक नियम में, कॉलमवार प्रारूप में विक्रेता के दायित्वों को बाईं ओर ए कॉलम में तथा क्रेता के दायित्वों को दाईं ओर बी कॉलम में दिया गया है।2010 के नियमों की ही तरह इनकोटर्म्स 2020 में भी 10 दायित्वों की सूची तैयार की गई है।क्रम कुछ बदला गया है। ये निम्नलिखित अनुसार हैं:

  • A1/B1 – सामान्य दायित्व
  • A2/B2 – डिलीवरी/ डिलीवरी लेना
  • A3/B3 – जोखिमों का हस्तांतरण
  • A4/B4 – कैरिज
  • A5/B5 – बीमा
  • A6/B6 – डिलीवरी/ परिवहन दस्तावेज
  • A7/B7 – निर्यात/आयात मंजूरी
  • A8/B8 – जांचना/ पैकिंग करना/ मार्किंग करना
  • A9/B9 – लागत निर्धारण
  • A10/B10 – सूचना/ नोटिस

लागत के लिए संदर्भ आवश्यकतानुसार शामिल किए गए हैं, लेकिन स्पष्ट रूप से ए 9 / बी 9 में इसकी व्याख्या की गई है।

मूल टेक्स्ट में प्रत्येक नियम के लिए उपर्युक्त सभी दायित्व दिए गए हैं। फिर भी सुविधा के लिए अब नया तीसरा खंड भी जोड़ा गया है।इन्कोटर्म्स2020 प्रकाशन में प्रत्येक दायित्व दिया गया है और बताया गया है कि प्रत्येक नियम कैसे डील करता है। ताकि प्रत्येक नियम के अंतर्गत दायित्वों की तुलना करना आसान हो सके। उदाहरण के लिए, ए2 डिलीवरी/ डिलीवरी लेने संबंधी नियम के अंतर्गत इस बात की आसानी से तुलना की जा सकती है कि प्रत्येक नियम के अंतर्गत क्या दायित्व हैं। जोखिमों और लागतों का मूल्यांकन करते समय ये सब काफी उपयोगी होते हैं।तदनुसार, यह निर्णय लेना आसान हो जाता है कि कौनसा नियम चुनना चाहिए।

इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि सटीकता सुनिश्चित करने और बाद में किसी संभावित विवाद से बचने के लिए कॉन्ट्रैक्टया अन्य दस्तावेजों में इन्कोटर्म्स का उपयोग करते समय उनके संस्करण का स्पष्ट उल्लेख जरूर किया गया हो।इस प्रकार, सीआईएफ रॉटरडैम इन्कोटर्म्स2020 सही उपयोगहै।यह न केवल क्रेताओं और विक्रेताओं को इन्कोटर्म्स के सही संस्करण को संदर्भित करेगा, बल्कि संबंधित प्रावधानों को लागू करने में भी मददगार होगा।

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